4जी के नेटवर्क पर 2जी स्पीड से बंट रहा राशन

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राज्यभर में 50 फीसदी से ज्यादा राशन डीलरों के पास अपग्रेडेड पीओएस मशीनें नहीं, लाभान्वितों को डीलर की दुकान पर काफी देर तक करना पड़ता है इंतजार

उदयपुर. राज्य में सार्वजनिक वितरण प्रणाली 2जी स्पीड से चल रही है। वजह यह कि ज्यादातर इलाकों में इलेक्ट्रॉनिक प्वॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीनें 4जी नेटवर्क को सपोर्ट नहीं करती हैं। ऐसे में 2जी की मंथर गति पर ही लाभान्वितों का सत्यापन किया जाता है और राशन देने की प्रक्रिया में दोगुने से ज्यादा समय लगता है।
सूत्रों मुताबिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में अनियमितताओं को रोकने के लिए केन्द्र सरकार ने पीओएस के जरिये उपभोक्ता का बायोमैट्रिक सत्यापन करने के बाद ही राशन देने की व्यवस्था लागू की थी। शुरुआत में राज्य सरकार ने राशन डीलरों को प्रत्येक को करीब 35 हजार रुपए कीमत की पीओएस मशीन उपलब्ध करवाई। 4जी नेटवर्क आने से पहले खरीदी गई इन मशीनों का दम पहले ही 2जी नेटवर्क की वजह से फूल रहा था, लेकिन अब हर जगह 4जी नेटवर्क का जाल बिछने के बाद भी 50 प्रतिशत से ज्यादा डीलरों के पास आज भी पुरानी मशीनें ही हैं, जो धीमी गति से काम कर रही हैं। ऐसे में हर उपभोक्ता को अपने अंगूठा लगाने, उसकी बायोमैट्रिक सत्यापन और पर्ची देने की प्रक्रिया में काफी समय लग रहा है। इस समस्या को राशन डीलर जिलों में रसद अधिकारियों व उनके माध्यम से मुख्यालय को भी अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक नई मशीनें मुहैया कराने को लेकर सरकार के स्तर पर निर्णय नहीं हुआ है।
– उदयपुर में 500 मशीनें 2जी के सहारे
जिले में 1013 राशन की दुकानों में से 50 फीसदी से ज्यादा 2जी सपोर्टेड मशीनें हैं। ये मशीनें राशन डीलरों के ही पैसों से सरकार ने उन्हें उपलब्ध करवाई, लेकिन ये मशीनें सरकार के अधीन हैं। डीलरों को फिर से ये सरकार को जमा करानी होती हैं। जिला स्तरीय अधिकारियों की बैठक में कई बार इन मशीनों को अपग्रेड करने का मुद्दा उठाया जा चुका है। मुश्किल यह कि डीलर फिर से नई मशीनों का पैसा लगाने को तैयार नहीं है, वहीं सरकार अपने स्तर पर पोस मशीनें देने का फैसला नहीं कर रही है। जिले में 24 दुकानें तो ऐसे दूरस्थ इलाकों में हैं, जहां 2जी नेटवर्क भी नहीं होने से उन्हें नो नेटवर्क शॉप घोषित कर रखा है।
– इसलिए लागू की थी व्यवस्था
देशभर में दशकों तक राशन घोटाले और भ्रष्टाचार की वजह से गरीबों के हक का अनाज डीलर खा जाते थे। अधिकांश राशन कार्ड डीलर अपने पास रख लेते थे और गरीब-अनपढ़ लोगों को अंगूठे लगवाकर राशन खुद उठा लेते थे। सरकार द्वारा किसानों से खरीदकर बेहद सस्ते दामों पर डीलरों को दिया यह गेहूं व अन्य अनाज बाजार में खूब पकड़ा भी जाता था। पोस मशीनों से वितरण लागू होने के बाद भ्रष्टाचार में 90 फीसदी तक की कमी आंकी गई।
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नई मशीनों के बारे में सरकार के स्तर पर ही कोई निर्णय हो सकता है। वैसे सरकार के निर्देश हैं कि पूरे माह राशन दुकानें खुली रखी जाएं। ऐसे में अब कतारें लगने की समस्या लगभग खत्म हो गई है। 2जी होने से सत्यापन की प्रक्रिया में थोड़ा समय तो लगता ही है।
ज्योति ककवानी, जिला रसद अधिकारी, उदयपुर


Patrika

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