स्कूलों में आंशिक ग्रीष्मावकाश क्यों नहीं, पढ़ाई-परीक्षा के बिना स्कूल जाना अखर रहा

शिक्षकों ने कहा- अब तो पोषाहार भी बंद है, पब्लिक ट्रांसपोर्ट से सफर करना बढ़ा रहा है चिंता

उदयपुर. शिक्षण संस्थाओं में पढ़ाई और परीक्षाएं पूरी तरह स्थगित करने के बाद स्कूलों में केवल ड्यूटी देने बुलाना शिक्षकों को अखर रहा है। उनका कहना है कि हजारों शिक्षक रोजाना पब्लिक ट्रांसपोर्ट से ट्रेवल भी कर रहे हैं, जो ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय, बीएन यूनिवर्सिटी के अलावा सीबीएसइ, आरबीएसइ ने भी अपनी परीक्षाएं रद्द कर दी हैं। प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल भी बंद हो गए हैं, वहीं विद्यालयों में पोषाहार वितरण भी नहीं हो रहा है। ऐसे में शिक्षक वर्ग ने सवाल उठाया है कि उन्हें रोजाना केवल स्कूलों में ड्यूटी देने के लिए क्यों बुलाया जा रहा है। राजस्थान शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ के प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष शेर सिंह चौहान बताते हैं कि इस तरह की ड्यूटी का अब औचित्य नहीं रह गया है, जब सरकार लोगों को एक-दूसरे के सम्पर्क में आने के अवसर घटाने को कह रही है। चौहान ने बताया कि चिंताजनक यह है कि उदयपुर शहर से व बड़े कस्बों से प्रतिदिन करीब दस हजार शिक्षक बसों, जीपों, ऑटो के माध्यम से पांच से 30-40 किलोमीटर तक की यात्रा कर रहे हैं। ऐसे में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करना शिक्षक वर्ग के लिए खतरनाक हो सकता है। जरूरी कामकाज घर से ही करने की व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।
सुविवि की तर्ज पर ग्रीष्मावकाश क्यों नहीं?
सुविवि ने १५ दिन का आंशिक ग्रीष्मावकाश लागू कर दिया। ये छुट्टियां बाद में ग्रीष्मावकाश में समायोजित हो जाएंगी। कुछ लोगों का यह भी कहना है कि एेसी व्यवस्था स्कूली सेटअप में भी लागू की जा सकती है। चूंकि बाकी परीक्षाएं बाद में करानी ही होंगी।
—– जिले में शिक्षा व्यवस्था—-
18.50 हजार शिक्षक करीब प्रारम्भिक व माध्यमिक सेटअप के सरकारी स्कूलों में
3750 स्कूल हैं पहली से 12वीं तक के उदयपुर जिले में
60 का स्टॉफ है रेजिडेंसी स्कूल में
54 से ज्यादा का स्टॉफ है फतह स्कूल में
40 गुरु गोविन्द सिंह स्कूल में
10 हजार अध्यापक अपडाउन करते हैं पब्लिक ट्रांसपोर्ट से
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शिक्षा निदेशालय के ताजा आदेश हैं कि सम्भाग, जिला एवं ब्लॉक-संकुल के कार्यालयाध्यक्ष रोटेशन के आधार पर अपने 50 प्रतिशत कार्मिकों की उपस्थिति सुनिश्चित करें। बाकी घर से ऑनलाइन काम करेंगे। 31 मार्च तक कोई बैठकें नहीं होंगी। यह आदेश राजकीय विद्यालयों के स्टॉफ पर लागू नहीं है।
शिवजी गौड़, उप निदेशक, प्रारम्भिक शिक्षा, उदयपुर

Patrika

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