सॉलिड वेस्ट पर राजस्थान अम्बिकापुर मॉडल की राह पर

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महिलाओं का स्वयं सहायता समूह करता हैं काम

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. राजस्थान को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट में अच्छे परिणाम देने को लेकर छत्तीसगढ़ के अम्बिकापुर के मॉडल की राह पकड़ी है। बड़े तौर पर वहां महिलाओं के स्वयंसहायता समूहों की ओर से सॉलिड वेस्ट पर काम कर रहा है और उस कार्य को राष्ट्रीय स्तर पर कई दूसरे शहरों ने भी उनके वहां लागू किया है। वैसे अभी तो प्रदेश के अफसरों व इंजीनियरों को वहां के मॉडल को देखने भेजा है। प्रदेश की नगर निकायों में सॉलिड वेस्ट पर बेहतर कार्य करने को लेकर अम्बिकापुर का नाम चुना। अफसरों की टीम को वहां के पूरे मॉडल को समझने के लिए भेजा है। स्वच्छता सर्वेक्षण की दौड़ एवं एनजीटी के डंडे के बाद स्वायत्त शासन विभाग (डीएलबी) ने सॉलिड वेस्ट पर ताकत से काम करने की योजना बनाई लेकिन चुनौती यह सामने आई कि सॉलिड वेस्ट पर किस शहर का मॉडल अपनाया जाए, कौनसा मॉडल कम खर्चे का होगा आदि बिन्दुओं पर विचार किया गया। बाद में सरकार ने अम्बिकापुर का मॉडल अपनाया।

ऐसा है अम्बिकापुर का मॉडल
अम्बिकापुर में रोजाना निकलने वाले कचरे को अलग-अलग एकत्रित करते है। वहां महिलाओं का समूह वार्डों में नियमित इस कार्य को अंजाम देते है। वे लोगों के घरों में जाकर हर सुबह रिक्शा से कचरा लेकर आते है। उसके बाद सूखे और गीले कचरे की छटाई की जाती है। कचरे में से निकलने वाले ढेर से कबाड़ व ठोस कचरों की बिक्री की जाती है और गीले कचरे से जैविक खाद व गैस बनाकर सप्लाई की जाती है।

यह सब भी है मॉडल में
– महिला समूहों को प्रशिक्षण देकर कचरे के बारे में पूरी जानकारी दी जाती।
– कचरे के निस्तारण के लिए ग्रेडिंग का तरीका भी बताते है।
– कचरा संग्रहण के दौरान ही गीले-सूखे कचरे को अलग एकत्रित किया जाता है।

उदयपुर के आयुक्त भी गए टीम में
उदयपुर नगरनिगम के आयुक्त अंकित कुमार सिंह, राजस्थान स्वायत्त शासन विभाग के मुख्य अभियंता, बीकानेर व अजमेर नगर निगम के इंजीनियर भी शामिल है।

Patrika

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