श्वानों की नसबंदी का टेण्डर रद्द, फिर से पशु चिकित्सालय को दी जा सकती है जिम्मेदारी

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ठेके की शर्तों की पालना नहीं कर पाई भिण्डी ऋषि पशु कल्याण समिति, शहर में बढ़ रही श्वानों की आबादी बन रही इंसानों पर खतरा

उदयपुर. शहर में ठप पड़े श्वानों के नसबंदी कार्यक्रम (एबीसी) के बीच उनकी बढ़ती आबादी खतरनाक होती जा रही है। नगर निगम ने ठेकेदार फर्म भिण्डी ऋषि कल्याण समिति, मध्यप्रदेश का ठेका रद्द कर दिया है।
अब निगम फिर से पुरानी व्यवस्था पर लौटते हुए राजकीय पशु चिकित्सालय, चेटक को यह जिम्मेदारी सौंप सकता है।
सूत्रों के अनुसार पिछले दिनों कई तरह की शिकायतों के बाद दो निरीक्षणों के दौरान निगम की टीम ने यहां ठेके की शर्तों का उल्लंघन पाया। 24 घण्टे चिकित्सक होने, केयर टेकर, श्वानों की देखभाल व सफाई की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने व अन्य अव्यवस्थाओं व लापरवाही पाए जाने पर निगम ने ठेका निरस्त कर दिया है। अब पशु चिकित्सालय को फिर से श्वानों की नसबंदी की जिम्मेदारी दी जा सकती है।

– पहले निगम ही दे रहा था
निगम अपने स्तर पर एबीसी चलाने के लिए पशु चिकित्सालय से बातचीत कर रहा है। पशु चिकित्सालय में नसबंदी ऑपरेशन के तमाम इंतजाम मौजूद भी हैं। करीब सात माह पूर्व तक शहर में नसबंदी कार्यक्रम सही तरीके से चल रहा था। निगम श्वानों को पकड़कर पशु चिकित्सालय तक पहुंचाता था, जहां उनकी ऑपरेशन थिएटर में नसबंदी के बाद उन्हें वार्ड में शिफ्ट कर पोस्ट ऑपरेटिव केयर दी जाती थी। उनके खाने-पीने की व्यवस्था एनिमल एड से हो रही थी। पांच दिन तक भर्ती रखने व एंटीबायोटिक तथा अन्य दवाएं देने के बाद उन्हें ंफिर से छोड़ दिया जाता था। इन सबके लिए प्रति नसबंदी निगम तय बजट देता था।

– प्रति सप्ताह हो रही थी 15-20 नसबंदी
करीब तीन साल से नसबंदी की जिम्मेदारी राजकीय पशु चिकित्सालय वहन कर रहा था। 15-20 नसबंदी प्रति सप्ताह हो रही थी। सात माह पहले निगम ने हाथ खींच लिए। फिर कुछ समय एनिमल एड के पास यह दायित्व रहा। उसके बाद जिस संस्था को ठेका दिया, उसने सवीना-तितरड़ी स्थित अपने परिसर में लापरवाही से यह कार्यक्रम चलाया। हालांकि अब एनिमल एड संस्था ने निशुल्क नसबंदी कार्यक्रम चलाने की पेशकश की है।

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एबीसी में लापरवाही सामने आने पर हमने सम्बंधित संस्था का टेण्डर निरस्त कर दिया है। अब आगे क्या होगा, यह अभी तय नहीं है।

अंकित कुमार सिंह, आयुक्त नगर निगम
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निगम अपने स्तर पर ही एबीसी चलाने पर विचार कर सकता है। डॉग केचिंग के लिए अब अलग से पिंजरा भी तैयार करवा दिया है।
नरेन्द्र कुमार श्रीमाली, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

Patrika

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