वर्ल्‍ड किडनी डे : किडनी के रोगी पुरुष और डोनेट करने में मह‍िलाएं आगे

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90 प्रतिशत महिलाएं कर रहीं किडनी डोनेट, अपनों की जिंदगियां बचाने के लिए मां, बहनें, पत्नियां कर रहीं किडनी डोनेशन, पुरुषों की संख्या कम

मधुल‍िका स‍िंह/ उदयपुर. किडनी के रोगी पुरुष अध‍िक हैं तो मह‍िलाएं क‍िडनी डोनेट करने में आगे हैं। अक्सर ये समझा जाता है कि पुरुष ही किडनी डोनेट करते होंगे, जबकि सच्चाई ये है कि महिलाएं किडनी डोनेट करने में पुरुषों से कहीं आगे हैं। संभाग में उदयपुर में लगभग 185 किडनी डोनेशन के मामले हो चुके हैं। इनमें 90 प्रतिशत महिलाओं ने किडनी डोनेट की थी। यानी परिवार की मां, बहनें, बेटियां ये जिम्मेदारी निभा रही हैं। उदयपुर में लेकसिटी किडनी केयर एंड रिलीफ फाउंडेशन के संस्थापक जितेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि गुर्दा दानदाताओं में महिलाओं की संख्या अधिक है। ये महिलाएं अपनों के जीवन को बचाने के लिए सहर्ष तैयार हो जाती हैं। नाथद्वारा की गीता देवी ने अपने पुत्र को, उदयपुर की मनीषा ने अपने पति को, धरियावद की हेमलता ने अपनी पुत्री को किडनी दान की है। किडनी दानकर्ता महिलाओं के अनुसार, अगर शरीर का अंग अपनों को बचाने में काम आ जाए तो इससे अच्छा क्या हो सकता है। जीवन से बड़ा कुछ नहीं है।

महिलाएं अधिक संवेदनशील
महिलाएं किडनी डोनेशन में आगे इसलिए रहती हैं कि महिलाएं, पुरुषों के मुकाबले ज्यादा संवेदनशील व जज्बाती होती हैं। उन्हें अपने परिजनों से ज्यादा हमदर्दी होती है फिर पुरुषों की किडनी फेल होने और ट्रांसप्लांट की आशंका ज्यादा होती है। सिर्फ जीवन साथी के लिए ही नहीं, महिलाएं अपने बच्चों, भाई-बहनों या दूसरे परिजनों को भी किडनी दान करती हैं। ये सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है। वहीं, दूसरे पहलू की बात की जाए तो इसकी बड़ी वजह आर्थिक बताई जाती है। अमरीका हो या कोई और देश हर जगह घर चलाने की जिम्मेदारी अक्सर पुरुषों के ऊपर होती है। बीमारी या ट्रांसप्लांट के दौरान, दान देने वाले को अक्सर महीने-दो महीने के लिए घर बैठना पड़ता है। इससे दोहरा आर्थिक नुकसान होता है इसलिए अक्सर महिलाओं को ये लगता है कि अंग दान कर के वो घर को होने वाला आर्थिक नुकसान कम कर सकती हैं।

इसलिए मनाया जाता है दिवस

विश्वकिडनी दिवस प्रतिवर्ष मार्च के दूसरे गुरुवार को मनाया जाता है। पहली बार विश्व किडनी दिवस वर्ष 2006 में शुरू किया था। यह इंटरनेशनल सोसाइटी ऑफ नेफ्रोलोजी और इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ किडनी फाउंडेशन की एक संयुक्त पहल थी। यह दिन वैश्विक स्वास्थ्य के प्रति एक जागरूकता अभियान है जो विश्व भर में किडनी के महत्व और किडनी की बीमारी तथा उससे संबंधित स्वास्थ्य समस्याओं के प्रभाव और आवृत्ति को कम करने पर केंद्रित है। गुर्दा या किडनी रोग को नजरअंदाज करना खतरनाक साबित होता है। बचाव के लिए नियमित जांच और जीवनशैली जरूरी है लेकिन जागरूकता भी जरूरी है। साथ ही लोगों को किडनी प्रत्र्यपण के लिए जागरूक करना भी अहम है। जागरूकता नहीं होने से आम लोग किडनी दान करने से बचते हैं।

लगभग 850 मिलियन लोगों को किडनी की बीमारी
दुनिया भर में लगभग 850 मिलियन लोग अलग-अलग कारणों से किडनी की बीमारी के शिकार हैं। खबरों के अनुसार क्रॉनिक किडनी रोग हर साल कम से कम 2.4 मिलियन लोगों की मौतों का कारण बन रहा है। किडनी के रोगों से बचने के लिए इस ओर तत्काल ध्यान देने और लोगों को अधिक से अधिक जागरूक करने की जरूरत है।

किडनी डोनर्स का कहना…
सुहाग को दिया जीवन

शादी से पहले पति को टायफॉइड होने से किडनी खराब हो गई थी, तब पति के पिताजी ने ही किडनी डोनेट की थी। फिर शादी के बाद वापस किडनी खराब होने पर मैंने किडनी डोनेट की। महिलाएं अपने सुहाग के लंबी आयु की कामना करती हैं, मुझे जब हकीकत में ये करने का मौका मिल रहा था तब मुझे ये करना ही था।
– मनीषा मेनारिया

मन से भ्रम करें दूर

ब्लड प्रेशर हाई होने से पति की दोनों किडनियां फेल हो गई थीं। ऐसे में मेरा ब्लड ग्रुप मैच होने से मैंने उन्हें किडनी
डोने ट की। मेरा मानना है कि किसी का जीवन बचाने से बेहतर काम कोई नहीं हो सकता है। किडनी डोनेशन के बाद भी मेरी लाइफ वैसे ही चल रही है इसलिए लोगों को मन से ऐसे भ्रम दूर रखने चाहिए और जरूरत पडऩे पर किसी के जीवन के लिए किडनी डोनेट करनी चाहिए।

– पूनम खंडेलवाल




Patrika

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