राणा कपूर की फैमिली की वजह से डूबा YES बैंक, अपनों को लोन बना बर्बादी की वजह

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  • राणा कपूर के परिवार के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी
  • 11 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में रहेंगे राणा कपूर

येस बैंक के पूर्व सीईओ राणा कपूर के पूरे परिवार के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया जा चुका है. बैंक संस्थापक राणा कपूर को 11 मार्च तक प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया गया है. ईडी के अधिकारी 30 से ज्यादा घंटे तक राणा कपूर से पूछताछ कर चुके हैं. बैंक संकट के पीछे राणा कपूर और उनके परिवार का प्रमुखता से नाम सामने आ रहा है.

राणा कपूर से पूछताछ के बाद हजारों-करोड़ों हेर-फेर के राज खुल रहे हैं. रविवार को ही राणा कपूर की बेटी रोशनी कपूर को मुंबई से लंदन जाते समय एयरपोर्ट पर रोक लिया गया. दरअसल, राणा कपूर के पूरे परिवार को लेकर लुकआउट सर्कुलर जारी किया गया है. सवाल उठ रहे हैं कि येस बैंक की खराब हालत के लिए जिम्मेदार कौन है.

येस बैंक के मामले में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है. येस बैंक की बदहाली से ग्राहकों में खलबली देखने को मिल रही है. बैंकों में रखे पैसों की सुरक्षा पर सवाल उठाए जा रहे हैं. ईडी की जांच में यह सामने आया है कि राणा कपूर एंड फैमिली के बिजनेस ने बैंक को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है.

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कई कंपनियों का मालिक कपूर परिवार

राणा कपूर की पत्नी बिंदु कपूर, उनकी बेटियां राखी कपूर, रोशनी कपूर और राधा कपूर कई कंपनियों की मालिक हैं. बिंदु कपूर फिलहाल 18 कंपनियों की डायरेक्टर हैं. उनकी बेटियां रोशनी कपूर और राधा कपूर 20 से ज्यादा कंपनियों की मालिक हैं. आरोप है कि येस बैंक से लोन जारी करने के बदले में इन्हें कई कॉर्पोरेट कंपनियों से रिश्वत भी मिली.

अब तक की गई पड़ताल में यह सामने आया है कि रिश्वत का लेनदेन सीधे तरीके से नहीं हुआ. इस पूरी प्रक्रिया में दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन (डीएचएफएल) के कई प्रमोटर शामिल थे. डीएचएफएल की ओर से DoIT अर्बन वेंचर्स को 600 करोड़ रुपये का लोन मंजूर करना, असल में येस बैंक का लोन चुकता न करने की रिश्वत थी.

बढ़ाकर बताई गई संपत्ति की कीमत

डीएचएफएल से एक कंपनी को लोन जारी करवाने के लिए 40 करोड़ की संपत्ति की कीमत को बढ़ा-चढ़ाकर 735 करोड़ रुपये का बताया गया. आरोप है कि कंपनियों से मिली रिश्वत से राणा कपूर एंड फैमिली ने संपत्ति में 2000 करोड़ रुपये का निवेश किया.

हालांकि इन तमाम आरोपों पर राणा कपूर ने चुप्पी साध रखी है. हिरासत में जान से पहले जब मीडिया ने उनसे पूछताछ करने की कोशिश की तो भी वे चुप्पी साधते नजर आए.

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ईडी की रिमांड को लेकर जब कोर्ट में सुनवाई हुई तब बचाव पक्ष ने कहा था कि बैंक ने जिन भी लोगों का लोन अप्रूव किया, उसके लिए सभी तय प्रक्रियाओं का पालन किया गया. कोई फर्जीवाड़ा नहीं बरता गया. खाताधारकों के गुस्से की वजह से राणा कपूर को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है. यह बैंक का ऑडिट नहीं किया गया है. तो यह कहां से कहा जा रहा है कि संपत्ति का मूल्य महज 40 करोड़ रुपये है.

क्या थी ईडी की दलील?

वहीं ईडी का कहना था जिस कंपनी को लोन दिया गया वह कोई काम नहीं करती. इसके बावजूद कंपनी को समय-समय पर लोन के तौर पर बड़ी रकम मिली. इन कंपनियों में परिवना के लोग डायरेक्ट हैं, जबकि कर्मचारी के नाम कोई भी नहीं है, या महज एक या दो लोग हैं.

‘सही समय से परिवार ने किया लोन का भुगतान’

राणा कपूर का कहना है कि उनकी तीनों बेटियों ने जो लोन लिया था, उसे लगभग चुका दिया गया है. ब्याज हमेशा सही तारीख पर भरा गया है. 2023 तक पूरा मूलधन चुका दिया जाएगा. बताया जा रहा है कि राणा कपूर के परिवार ने रिश्वत के पैसों से जो संपत्ति खरीदी वो भारत के अलावा ब्रिटेन में है.

यूके की संपत्ति की कीमत लगाई जा रही है. वहीं ईडी ने राणा कपूर की तीनों बेटियों और राधा कपूर के पति आदित्य खन्ना के फोन-लैपटॉप खंगाले हैं. ईडी का मकसद इनकी कंपनियों से जुड़े लेन-देन की जानकारी हासिल करनी है.

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इसी बीच येस बैंक के मामले में सियासत भी हो रही है. कांग्रेस जहां मोदी सरकार पर निशाना साध रही है, वहीं मोदी सरकार का कहना है कि ये सब यूपीए के दौरान फोन पर लोन दिलाने के खेल का नतीजा है. सीबीआई ने डीएचएफएल और डीओआईटी अर्बन वेंचर्स के खिलाफ केस दर्ज किया है. यह राणा कपूर के बेटियों की कंपनी है.

कंपनियों की कमाई नहीं लेकिन मिलता रहा लोन

ईडी की पूछताछ में कई हैरान करने वाली जानकारी भी सामने आई है. राणा कपूर की बड़ी बेटी रोशनी कपूर 23 कंपनियों में डायरेक्टर हैं. राणा कपूर की दूसरी बेटी राधा राणा कपूर 20 कंपनियों की निदेशक हैं. जबकि राधा कपूर के पति आदित्य खन्ना भी कई कंपनियों के निदेशक हैं. इतना ही नहीं खुलासा ये भी हुआ है कि ज्यादा कंपनियों का बोर्ड ऑफ डायरेक्टर एक जैसा ही हैं. अधिकतर कंपनियों में बहुत कम कर्मचारी हैं.

कमाल ये भी है कि किसी भी कंपनी की कोई कमाई तक नहीं थी और कमाई ना होने के बावजूद सभी कंपनियों को लोन मिलता रहा. यही नहीं राणा कपूर की एक बेटी को डीएचएफएल कंपनी से 600 करोड़ रुपये मिले थे.

रिश्तेदारों को बांटे गए लोन!

पूर्व सीइओ राणा कपूर पर निजी रिश्तों को ध्यान में रखकर लोन बांटने के आरोप लगाए गए और 5000 करोड़ की हेराफेरी का आरोप लगा. जानकारी के मुताबिक येस बैंक ने डीएचएफएल से 3700 करोड़ के डिबेंचर्स यानी ऋणपत्र खरीदे थे. फिलहाल मामले की जांच शुरु हो गई है लेकिन येस बैंक के 2 लाख से ज्यादा खाताधारक बस यही चाहते हैं कि उनका जितना भी पैसा बैंक में जमा है वो सुरक्षित रहे.

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