यहां चारपाई पर अस्पताल पहुंचते हैं मरीज और गर्भवती महिलाएं, तीन किलोमीटर लंबा रास्ता करना पड़ता है तय

एक तरफ तो सरकार निरोगी राजस्थान ( Nirogi Rajasthan ) की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कई आदिवासी क्षेत्र ऐसे हैं जहां एम्बुलेंस पहुंचना तो दूर मोटरसाइकिल भी नहीं जा पाती। ऐसे में मरीजों को चारपाई पर लेटाकर कई किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है…

उदयपुर। एक तरफ तो सरकार निरोगी राजस्थान ( Nirogi Rajasthan ) की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर कई आदिवासी क्षेत्र ऐसे हैं जहां एम्बुलेंस पहुंचना तो दूर मोटरसाइकिल भी नहीं जा पाती। ऐसे में मरीजों को चारपाई पर लेटाकर कई किलोमीटर पैदल चलकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। इंसान को चांद पर बसाने के दावे और कोशिशों के बीच धरती पर आज भी ऐसे मंजर नजर आते हैं, जो मानव सभ्यता के पिछड़े होने के जीते-जागते सबूत हैं। यकीन न हो, तो उदयपुर जिले के आदिवासी बहुल गोगुन्दा ब्लॉक की बगडुन्दा ग्राम पंचायत की भागल सागो का बेरा में चले जाइए। यहां आज भी बस्ती के मरीज हों या गर्भवती महिलाएं, चार कंधों पर टिकी चारपाई पर लेटकर तीन किलोमीटर का सफर तय कर अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे नजारों को देखकर आंखें ‘विकास’ पर विश्वास नहीं करतीं।

दक्षिण राजस्थान की इस बस्ती में आदिवासी समुदाय के 40 महिलाएं, पुरुष-बच्चे रहते हैं। कई दशक से बीपीएल श्रेणी के इन परिवारों की खेती-बाड़ी और आवास, जीवन सब कुछ यहीं है। कुछ पक्के मकान भी बनने लगे हैं। कुछ लोग झोंपड़ों में रहते हैं। वन विभाग ने इन्हें वनाधिकार के पट्टे जारी किए हैं।

बाइक भी नहीं पहुंचती
बस्ती तक जाने के लिए मुख्य मार्ग से तीन किलोमीटर अन्दर तक रास्ता पगडंडीनुमा बना हुआ है। कहीं एक तरफ पहाड़ी हिस्सा है, तो दूसरी ओर खाई। कहीं ऊबड़-खाबड़ पथरीली जमीन है। बस्ती से बाहर जाने के लिए तीन किलोमीटर का लम्बा रास्ता पैदल चलकर तय करना पड़ता है। इस पर चलना आम रास्ते के सफर से ज्यादा कठिन है। यहां चारपहिया वाहन तो छोड़ो, कोई मोटरसाइकिल या साइकिल तक नहीं जा सकती है।

बच्चों के लिए स्कूल भी दूर
बच्चों के लिए स्कूल भी यहां से काफी दूर है। लम्बा रास्ता पैदल ही तय कर स्कूल जाते हैं। जो पहाड़ी रास्ता तय करने में सक्षम होते हैं, वे ही स्कूल जाते हैं, बाकी बच्चे पढऩे की उम्र में भी घरों में ही रहते हैं।

इनका कहना है
– राजस्थान पोर्टल पर मैंने इस बारे में शिकायत दर्ज करवाई है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। मंत्री और काफी सारे विभागों के चक्कर लगा चुके हैं, लेकिन कोई नहीं सुन रहा।
भूरीलाल गमेती, बस्तीवासी

– राजस्व गांव तो सभी पक्की सडक़ों से जुड़े हैं। कोई बस्ती है, तो ग्राम पंचायत मनरेगा में गे्रवल रोड बनवा सकती है। मेरे पास अभी तक कोई ऐसी मांग नहीं आई।
जितेन्द्र कुमार पाण्डे, उपखण्ड अधिकारी, गोगुन्दा, उदयपुर

– मेरे प्रयास 2005 से चल रहे हैं। मेरा यह दूसरा कार्यकाल है। वनाधिकार के तहत सामूहिक फाइल लगाई थी। रास्ते में वन विभाग की जमीन है। कई बार सीसीएफ तक प्रस्ताव भेजे, लेकिन एनओसी नहीं मिली।
प्रभुलाल, सरपंच, बगडुन्दा की भागल

Patrika

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