मुम्बई से आए हजारों लोग सीधे गांव पहुंचे, अब गांवों में स्क्रीनिंग

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अकेले मेवाड़-मारवाड़ आ रहीं ठसाठस भरी 70 बसें, किराया भी दोगुना हुआ, जाने वाली बसें हैं खाली

उदयपुर. देश में सबसे ज्यादा कोरोनाग्रस्त मरीज महाराष्ट्र में सामने आने के बाद मुम्बई से पिछले इस दिनों में बड़ी तादाद में आए प्रवासी सीधे अपने गांव और घरों तक पहुंच गए हैं। हालांकि पुलिस ने रतनपुर बॉर्डर पर गाडिय़ों की जांच और चिकित्सा विभाग ने स्क्रीनिंग शुरू की, लेकिन घर जा चुके हजारों लोगों की स्वास्थ्य जांच को लेकर चिकित्सा विभाग के कान खड़े हो गए हैं।
कोरोना का कहर ज्योंही बरपना शुरू हुआ, प्रवासियों ने महाराष्ट्र से राजस्थान की ओर पलायन शुरू कर दिया। हर रोज केवल मायानगरी से ही करीब 70 बसों में पांच हजार लोग मेवाड़ और मारवाड़ की ओर जा रहे हैं। ये अब तक बिना किसी जांच के घर पहुंच गए। अधिकांश लोग कामगार श्रेणी के हैं, जो रोजगार की तलाश में वहां गए थे।
मुम्बई के ट्रेवल एजेंट सुरेश सिंह राजपूत बताते हैं कि अधिकांश लोग घर जाना चाहते हैं। इसलिए अचानक वापसी को लेकर भगदड़ मची। राजस्थान जा रही गाडिय़ां ओवरलोडेड हैं। जिन्हें अन्दर जगह नहीं मिल रही, वे बसों के ऊपर बैठकर जा रहे हैं। मुम्बई वापसी में गाडि़या खाली हैं।
– सिंगल स्लीपर 800 से हुई 1600
तीन माह पहले सिंगल स्लीपर का किराया 800 तथा डबल स्लीपर का 1600 रुपए था, जो बढ़कर 1400 और 2800 रुपए हो गया है। बताया गया कि मुम्बई से वाया अहमदाबाद होकर उदयपुर के रूट से प्रतिदिन 40 बसें गुजर रही हैं।
– परीक्षाओं को लेकर असमंजस में
इसके अलावा गुजरात में भी बड़ी तादाद में दक्षिण राजस्थान के व्यापारी परिवार सहित रहते हैं। परीक्षाएं स्थगित हैं, लिहाजा सैकड़ों परिवार असमंजस में हैं कि अगर राजस्थान लौटें या नहीं। नई तिथि जल्दी आने की स्थिति में उन्हें फिर मुम्बई लौटना पड़ेगा।
2003 जैसे बन रहे हालात
मुम्बई में राजस्थानी परिवारों के बारे में मनीष बताते हैं कि मुम्बई में लॉकडाउन की स्थिति बनने लगी है। 2003 में भारी बरसात में मम्बई डूबने की अफवाहें फैलने के बाद लोग पलायन कर गए थे। कुछ ऐसे ही हालात बन रहे हैं। काम धंधे, फैक्ट्रियां, दफ्तरों के साथ ही छोटी-मोटी दुकानें बंद होने लगी हैं। अकेले जवेरी बाजार में ही दो हजार दुकानें बंद हैं। लोगों के पास काम नहीं रहा, ऐसे में वे घर लौटना मुनासिब समझ रहे हैं।
–मेवाड़-मारवाड़ का मुम्बई कनेक्शन–
– 10 हजार लोग राजस्थान के जैन समाज के परिवार सहित रहते हैं
– 90 हजार से ज्यादा लोग ब्राह्मण, राजपूत सहित अन्य जातियों के वहां व्यापार, नौकरी करते हैं
– 40 हजार से ज्यादा लोग अब तक पहुंच चुके हैं घर

कुवैत में फंसे हैं कई लोग
दक्षिण राजस्थान के उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौडग़ढ़ से कामकाज के सिलसिले में कुवैत गए कई लोग वहां फंसे हैं। लोग भारत सरकार से वहां से किसी तरह उन्हें ‘घरÓ पहुंचाने की गुहार लगा रहे हैं। कुवैत में काम करने वाले राजसमंद के युवक मुस्तफा बोहरा ने बताया कि कोरोना के खौफ के चलते लॉकडाउन जैसे हालात हैं। यहां दक्षिण राजस्थान के काफी लोग हैं, जो वर्क परमिट पर आए थे। कुवैत में फैक्ट्रियां, बाजार, दफ्तर बंद हो गए हैं। उन्हें घरों में रहने को कहा गया है। अपनी सेहत की चिंताएं उन्हें खाए जा रही हैं। अधिकांश फ्लाइट्स भी रद्द हो गई हैं। इधर, भारत सरकार ने कुवैत में कोई भारतीय नहीं होने का दावा किया है।

Patrika

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