मंत्री विस में कटारिया से बोले सरकार आपकी थी, गुलाब कटारिया बोले सरकारे आती-जाती है, जिम्मेदार तो अधिकारी है

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5 बार कोचिंग, 287 जजा छात्र, 22 पास, सलेक्शन मात्र 1 का

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. राज्य विधानसभा में सोमवार को जनजाति विद्यार्थियों के लिए प्रशासनिक सेवा के लिए जो प्रशिक्षण केन्द्र के सवाल पर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने जवाब दे रहे जनजाति राज्यमंत्री अर्जुनसिंह बामनिया के जवाब को कहा कि प्रश्रों के उत्तर पूरे नहीं बनाए। बामनिया ने कहा कि जिस वर्ष कोचिंग नहीं होने की बात कर रहे है तब सरकार किस की थी तो कटारिया बोले सरकारें तो आती-जाती है, जिम्मेदार तो अधिकारी है। झाड़ोल विधायक बाबूलाल खराड़ी ने जनजाति विद्यार्थियों के लिए प्रशासनिक सेवा के लिए जो प्रशिक्षण केन्द्र चलाया जा रहा है उसमें पांच साल का रिपोर्ट कार्ड सामने रखा जाए। जवाब देते हुए जनजाति राज्यमंत्री अर्जुनसिंह बामनिया ने कहा कि पांच प्रशिक्षण में 287 जजा विद्यार्थियों को कोचिंग दी गई, 22 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए तथा एक का चयन हुआ। सदन में मंत्री ने कहा कि टीआरआइ के माध्यम से राजस्थान राज्य एवं अधीनस्थ सेवाएं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा के लिए कोचिंग का आयोजन किया गया। विधायक खराड़ी ने पूछा कि जो कोचिंग कराते है, उनक योग्यता के आधार पर रखा जाता है। विस अध्यक्ष ने कहा कि क्या सरकार प्राइवेट कोचिंग से कोई अनुबंध करके कोचिंग करने की व्यवस्था रखती है जिससे वहां ज्यादा विद्यार्थी निकल सके। इस बीच नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि मंत्री प्रश्र का पैरा पूरा पढ़ते नहीं है और उसके अनुसार उत्तर नहीं बनाते नहीं है। कटारिया ने कहा कि चार साल की उपलब्धि में एक का चयन हो सका, क्या इतना पैसा खर्च किया उसका परिणाम केवल एक छात्र रहा। वर्ष 2018-19 व 2019-20 में कक्षाएं शुरू नहीं होने की क्या मजबूरी रही। राज्यमंत्री बामनिया ने कहा कि 18-19 में किसकी सरकार थी, कटारिया ने कहा कि सरकारी किसी की भी हो, जो मुख्य अधिकारी है वह जिम्मेदार है, सरकारें तो आती रहेगी, जाती रहेगी। बामनिया ने सदन में आश्वस्त करते हुए कहा कि जिस भी अधिकारी की इसमें लापरवाही है, उसके खिलाफ जांच करके कार्रवाई की जाएगी। साथ ही 2020-21 में अच्छे से संघ लोक सेवा आयोज और राजस्थान लोक सेवा आयोग दोनों की कोचिंग कराएंगे। कटारिया ने मंत्री बामनिया से कहा कि 2018-19 के कागज और 2019-20 के कागज सदन की फ्लोर पर रख दो, उसके बाद बात करुंगा कि आपकी तरफ से कोई प्रयास भी हुआ या नहीं हुआ।

एक जजा छात्र का चयन
परीक्षा वष…र् छात्रों को कोचिंग दी… उत्तीण…र् चयन हुआ
आरएएस प्री… 2015-16… 70… 12… 00
आरएएएस मुख्य…2015-16… 10… 00… 00
आरएएस प्री… 2016-17… 136… 08… 00
आरएएएस मुख्य…2016-17… 15… 01… 01
आरएएस प्री… 2017-18… 56… 01… 00

(वर्ष 2018-19 व 2019-20 में कोचिंग नहीं हुई)

2018-2020 में प्राकृतिक आपदा से कोई खराबा नहीं
मावली विधायक धर्मनारायण जोशी के सवाल पर जवाब देते हुए सरकार ने बताया कि मावली, वल्लभनगर व उदयपुर ग्रामीण विधानसभा में दिसम्बर 2018 एवं जनवरी 2020 में प्राकृतिक आपदा से कोई खराबा नहीं हुआ है। वर्ष 2019 में मावली विस में 3954 हैक्ट., वल्लभनगर में 43520 और ग्रामीण विस में 8294 हैक्ट. फसलों का खराबा हुआ है। सरकार ने बताया कि एसडीआरएफ नॉम्र्स के अनुसार 902 कृषकों को 29.22 लाख रुपए कृषि आदान अनुदान का भुगतान कर दिया गया है। मंत्री मा. भंवरलाल मेघवाल के जवाब से संतुष्ट नहीं हुए विधायक जोशी ने कहा कि मावली व वल्लभनगर दोनों तहसीलें लगती हुई है, एक पंचायत में फसल का खराबा हुआ 35 प्रतिशत तो उससे लगी पंचायत वल्लभनगर में खराबा हुआ 65 प्रतिशत। हमारे यहां फसल खराबा 3454 हैक्टय तो वल्लभनगर में 43000 हैक्टयर में हुआ, ये इतना अंतर क्यों?

विस्थापितों को आवास पर फैसला कोर्ट के निर्णय के बाद
उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा के औद्योगिक क्षेत्र के सवाल पर सरकार ने जवाब देते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्र भामाशाह कलड़वास की प्रशासनिक स्वीकृति अक्टूबर 1997 में जारी करते हुए औद्योगिक क्षेत्र में 156.25 एकड़ भूमि आवंटित की गई। इसी प्रकार आइआइडी सेंटर की प्रशासनिक स्वीकृति 20 जून 1998 में जारी की गई तथा इस क्षेत्र को 156.25 एकड़ भूमि आवंटित की गई। इसी प्रकार कलड़वास विस्तार की प्रशासनिक स्वीकृति 23 मई 2011 को जारी की, क्षेत्र में कुल 70.19 एकड़ भूमि आवंटित की गई। एक सवाल के जवाब में सरकार ने कहा कि आइआइडी कलड़वास व भामाशाह कलड़वास की राजकीय भूमि पर विकसित किए, जब रीको को भूमि आवंटित की गई तब वहां कोई बस्ती बसी हुई नहीं थी। मंत्री परसादीलाल मीणा के जवाब पर मीणा ने कहा कि खंड तीन में सरकार बता रही है कि वहां पर कोई किसान नहीं है लेकिन हकीकत यह है कि रीको नहीं बसा था उससे पहले से ही वहां 13 किसान बसे है, वहां 2008 में सडक़ों का काम चल रहा था, तब उनको रीको ने नोटिस भी दिए। अभी तक उनको मकान नहीं दिया है। उद्योग मंत्री परसादी लाल मीणा ने कहा कि कलड़वास के रीको एरिया में विस्थापित परिवारों को आवास देने के संबंध में सुप्रीम कोर्ट का निर्णय आने के बाद ही कोई कार्यवाही की जा सकेगी। मंत्री मीणा ने कहा कि रीको की मकान देकर मुआवजा देने की नीति नहीं है, रीको तो जमीन के बदले 25 प्रतिशत जमीन देने की नीति है।

गोगुंदा विधायक ने छात्रावासों पर सवाल किया
गोगुंदा विधायक प्रतापलाल भील के सवाल पर सरकार ने बताया कि विस क्षेत्र गोगुंदा में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग की ओर से 7 आश्रम छात्रावासों,1 एकलव्य मॉडल रेजीडेन्सियल स्कूल तथा सामाजिक अधिकारिता विभाग की ओर से 4 छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है।

मकानों की चाबियां दे दी पानी नहीं दिया

ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा ने सदन में कहा कि यूआईटी के पेराफेरी की कॉलोनियों में पीने का पानी नहीं। मेगा आवास योजना के मकानों में पानी नहीं दिया गया। योजना के तहत चाबियां तो चुनाव से पहले आनन-फानन क्वार्टस की दे दी गई लेकिन पीने का पानी नहीं दिया गया। यूआईटी ने पैसा दिया, सरकार का एक पैसा नहीं लग रहा है उसके बावजूद भी उनको पानी नहीं दिया। मीणा ने कहा कि पीएचइडी विभाग इतना ढीला काम कर रहा है, या सरकार नहीं करने दे रही है अथवा अधिकारी नहीं करना चाहते है। ग्राम पंचायत तीतरड़ी जिसमें जयसमंद से पानी दिया जाता है वहा फिल्टर प्लांट की क्षमता कम है।





Patrika

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