भटवाड़ा टापू पर आवासीय जमीन पर रिसोर्ट बना दिया, एसडीओ-तहसीलदार पर कार्रवाई करो, बोले कटारिया

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आदिवासियों की जमीन पर अतिक्रमण भी कर दिया, हटाकर रिसोर्ट सीज की मांग की

मुकेश हिंगड़ / उदयपुर. विधानसभा में बुधवार को विस में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने जयसमंद के भटवाड़ा के टापू में आवासीय जमीन पर रिसोर्ट बनाने, आदिवासियों की जमीन पर कब्जा करने कर मुद्दा उठाते हुए रिसोर्ट को सीज करने और दोषी एसडीओ व तहसीलदार पर कार्रवाई करने की बात कही। सदन में स्थगन प्रस्ताव के तहत विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि जयमंसद झील के भटवाड़ा टापू पर आदिवासी परिवार की जमीन को अवैध तरीके से होटल निर्माण पर बोले। कटारिया ने कहा कि छोटा सा गांव भटवाड़ा है, वहां आदिवासी परिवार के लोग रहते है जिसमें मोघा, कोदरा, मीणा पूरा परिवार है। उस परिवार की जो जमीन है वह अलग-अलग रकबा की है लेकिन सारा मिलाकर 0.36 हैक्टेयर जमीन है। ये सारी की सारी कृषि भूमि को पहले अकृषि में चेंज कराओ और इसके लिए उसके लिए जो भी प्रलोभन या कोई समझाइश की हो। कटारिया ने कहा कि इसके लिए तहसील में आवेदन कर दिया और तहसीलदार ने फरवरी 2014 में चेंज कर दिया। इसके बाद उन्होंने एसडीएम के माध्यम से इस जमीन में से भी 1100 मीटर जमीन को, उसमें 600 निर्माण के लिए और 400 मीटर आवास के लिए खुला छोडऩे के लिए स्वीकृति ली है। कटारिया ने सदन में सत्तापक्ष की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसमें आप बोलेंगे कि आपके समय में हुआ, चाहे मेरे समय में हुआ जो गलत हुआ है वह गलत है। उन्होंने कहा कि वहां जिस व्यक्ति ने इसको खरीदा और खरीदकर एक रिसोर्ट का निर्माण कर दिया। सामान्यत आवासीय जमीन है, वह रिसोर्ट में चेंज नहीं हो सकती है। वह व्यवसायिक गतिविधि है और व्यवसायिक गतिविधि के लिए नीचे की कोर्अ ने ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी व्यवसायिक गतिविधि माना है। इस व्यवसायिक गतिविधि के कारण से इन इन आदिवासियों को भ्रमित करते कौडियों में इस जमीन को खरीदा। उन्होंने कहा कि जो जमीनी खरीदी वह 0.36 हैक्टेयर थी लेकिन उन्होंने इसकी 15 बीघा जमीन पर कब्जा करके अपना रिसोर्ट बनाकर इस व्यवसाय को शुरू कर दिया। अधिकारी इस जमीन को न तो आवासीय में परिवर्तित कर सकते और न इस पर व्यवसायिक स्वीकृति दे सकते थे। इसमें तहसीलदार और एसडीओ स्वयं भी, अभी उदयपुर कलक्टर ने जो फैसला किया है उसमें माना कि इनको गलत तरीके से आवासीय में कन्वर्ट करके व्यवसायिक गतिविधि तक पहुंचा दिया। इसके लिए उन्होंने राजस्व विभाग को रेफर किया। कटारिया ने कहा कि लाखों-करोड़ों की जमीन को कौडिय़ों में लेकर जिस प्रकार से जयपुर के व्यक्ति ने रिसोर्ट बनाया उस पर राजस्व मंत्री कार्रवाई करते हुए उसको सीज करे, जो अतिरिक्त आदिवासी की जमीन पर हुए कब्जे को हटाते हुए आदिवासी को दिलाए। साथ ही उन्होंने कानून की अवहेलना करने वाले तहसीलदार व एसडीओ के विरुद्ध भी कार्रवाई करने, दूसरी गतिविधियां बंद करने को कहा। जिंक की दरीबा माइंस का वेस्ट हवा-पानी व जमीन खराब कर रहा : किरण राजमंसद विधायक किरण माहेश्वरी ने राजसमंद जिले के दरीबा स्थित हिन्दुस्तान जिंक स्मेल्टर माइंस में कर्मचारियों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे विपरीत प्रभाव पर अपनी बात सदन में रखी। किरण ने कहा कि करीब 8-9 साल से एक हाइड्रो लेड प्लांट चल रहा है इसमें करीब 800 से 1000 कर्मचारी कार्य करते है। वहां कुछ कर्मचारियों को कैंसर हो गया, किसी की लैड की मात्रा बढऩे से मौत हो गई, किसी को लकवा। माहेश्वरी ने कहा कि दरीबा माइंस में वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट भी नहीं है, वहां पर जितना भी वेस्ट निकलता है उसमें सीमेंट मिलाकर वहां पर पहाड़ बना दिया जाता है। वेस्ट सीधा जमीन में जा रहा है जो पूरा पानी व जमीन को खराब कर रहा है। उन्होंने हाईलेवल कमेटी बनाकर उसे वहां की हवा-पानी की जांच कराने की मांग की। गोगुंदा में बालक मॉडल स्कूल का बजट देगी सरकार गोगुंदा विधायक प्रतापलाल भील ने गोगुंदा में एकलव्य रेजीडेंसियल मॉडल स्कूल में छात्र-छात्राओं के छात्रावास के पृथक-पृथक छात्रावास बनाने को लेकर सवाल किया। सदन में जवाब देते हुए जनजाति राज्यमंत्री अर्जुनसिंह बामनिया ने कहा कि इस छात्रावास के लिए केन्द्र सरकार ने वर्ष 2015 में 12 करोड़ रुपए की स्वीकृति देते हुए कहा कि उसकी क्षमता 480 है जिसमें 240 छात्र एवं 240 छात्राओं के लिए छात्रावास का निर्माण किया जाना था। मंत्री ने बताया कि वहां पर कन्या छात्रावास के लिए प्रिंसीपल क्वार्टर, चार लेक्चर क्वार्टर, चारदीवारी, दो चौकीदार क्वार्टर, अंडर ग्राउंड वाटर टैंक, पंप हाउस, 2 रेन वाटर हार्वेस्टिंग नलकूप के साथ आंतरिक सडक़ों का निर्माण किया गया। केन्द्र सरकार से राशि के अभाव में छात्रों के छात्रावास का निर्माण नहीं किया गया।





Patrika

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