बर्ड विलेज मेनार आईं इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन फ़िल्म मेकर गुंजन मेनन

मेनन ने मेनार वेटलैंड्स पर माइग्रेटरी बर्ड्स की अठखेलियां उनकी बड़ी तादाद को कैमरे में कैद किया

मेनार. बर्ड विलेज मेनार के जलाशय इन दिनों प्रवासी परिंदो से आबाद है। परिंदो की अठखेलियां देखने देश ही नहींं विदेश से भी पक्षीविदों एव बर्ड वॉचर्स का आना जारी है। इसी क्रम में गत दिवस इंटरनेशनल वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन फिल्म मेकर गुंजन मेनन मय टीम के साथ मेनार पहुँची। मेनन ने मेनार वेटलैंड्स पर माइग्रेटरी बर्ड्स की अठखेलियां उनकी बड़ी तादाद को कैमरे में कैद किया । अपनी सुबह से शाम दिन भर की यात्रा में मेनन एव टीम ने मेनार आईबीए लेक कॉम्प्लेक्स के जलाशयों का अवलोकन किया। टीम ने मेनार में ग्रामीणों से जल सरंक्षण एव परिंदो के संवर्द्धन में किये कार्यो को जाना । ग्रामीणों से चर्चा में उन्होंने जाना की की तरह से यहां के निवासियों ने इन जलाशयों को सहेजा है और उन वजहों एव विशेताओ पर चर्चा की क्यो अन्य जलाशयों की अपेक्षा मेनार वेटलैंड्स पर प्रवासी अधिक आते है। टीम लीडर्स ने ग्रामीणों द्वारा परिंदो को बचाने के लिए लिए गए निर्णयों एव कार्यो की सराहना की । इस दौरान गुंजन मेनन , सयम , शरद अग्रवाल , मत्स्यक विश्वविधालय के पूर्व डीन डॉ. एल.एल शर्मा , शोधार्थी दर्शना दवे , महेश दिवेधी डूंगरपुर पक्षी मित्र दर्शन मेनारिया, राधेश्याम कानावत, रामचन्द्र एकलिंगदासोत , भावेश मेनारिया आदि मौजूद थे। स्थानीय पक्षी मित्रो ने गांव इतिहास एव मेनार आईबीए लेक कॉम्लेक्स में विभिन्न प्रजातियो के बारे में विस्तृत जानकारी दी।

गौरतलब है क‍ि गुंजन मेनन एक कंजर्वेशन फिल्म मेकर और लेखक है। 2016 में ब्रिस्टल में नेचुरल हिस्ट्री यूनिट के साथ मिलकर ब्रिस्टल में वाइल्डलाइफ फिल्ममेकिंग में मास्टर्स किया। इनकी फिल्म ने 30 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कारों के साथ कई पुरस्कार जीते चुकी हैं । इनकी कहानियां जो एनिमल प्लैनेट और डिस्कवरी चैनल पर प्रसारित की गई। वही उन्होंने भारत में अपनी सामान्य व्यवहारिक धारणा को बदलने और बदलने के लिए “व्हाई वी लव बैट्स” नामक एक अभियान शुरू किया। गुंजन मेनन वाइल्डलाइफ कंजर्वेशन पर प्रभावशाली कहानियों को बताने और अपने शिल्प के माध्यम से आवाज देने वाले को आवाज देने का लक्ष्य रखती है।




Patrika

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