पहले से बेरोजारों की भीड़, इस साल नहीं खुलेगा एक भी बीएड कॉलेज

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राज्य में प्रशिक्षित छात्राध्यापकों की डिमांड और सप्लाई का संतुलन बनाने की कोशिश, एमएड कॉलेज खोलने की ले सकेंगे अनुमति

उदयपुर. राज्य में कुकुरमुत्तों की तरह पनप चुके बीएड कॉलेजों से जहां एक तरफ प्रशिक्षित युवाओं की भीड़ निकल रही है, वहीं दूसरी ओर सरकार की ओर से नौकरी के पर्याप्त अवसर नहीं मिलने पर यह भीड़ बेरोजगारी बढ़ा रही है। इस पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने नए शिक्षण-सत्र में एक भी बीएड कॉलेज नहीं खोलने का फैसला किया है। इस सम्बंध में उच्च शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा आयुक्त, सभी विश्वविद्यालयों को आदेश जारी कर दिए हैं।
संयुक्त सचिव डॉ. मोहम्मद नईम ने राज्य सरकार की नीति के तहत राज्य में नए शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालयों की स्थापना के लिए एनओसी जारी करने, नए विषय स्वीकृत करने या सीटें बढ़ाने की राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीइ) को सिफारिश के सम्बंध में शिक्षण-सत्र 2021-22 के लिए ये आदेश जारी किए हैं।
– इन नए पाठ्यक्रमों के लिए नहीं मिलेगी अनुमति
सरकार इस शिक्षण-सत्र में बीएड, बीएलएड (बैचलर ऑफ एजुकेशन), पुराने मॉडल के माध्यम से बीएड, तीन साल के एकीकृत बीएड-एमएड कार्यक्रम, चार साल के एकीकृत बीए-बीएड, एमएससी-एमएड पाठ्यक्रमों के लिए न तो अनुमति मिलेगी न एनओसी जारी की जाएगी।
– एमएड कॉलेज खुल सकेंगे
एमएड, बीपीएड, एमपीएड, आइटीइपी (प्री-प्राइमरी से प्राइमरी स्तर तक) व आइटीइपी (अपर प्राइमरी से सैकण्डरी स्तर तक) पाठ्यक्रमों के लिए एनओसी जारी हो सकेगी। शिक्षा शास्त्री और शिक्षा आचार्य जैसे एकीकृत पाठ्यक्रमों पर ये आदेश लागू नहीं होंगे।
– 221 कॉलेज, एक साल में 15 हजार प्रशिक्षित युवा
राज्यभर में 221 बीएड कॉलेज हैं, जहां से करीब 15 हजार बेरोजगार युवा शिक्षक प्रशिक्षण लेकर निकल रहे हैं। इसकी तुलना में राज्य सरकार नौकरी नहीं दे पा रही है। प्रदेशभर में शिक्षकों के चार लाख 49 हजार 245 स्वीकृत पदों में से 70 हजार 993 पद खाली हैं। द्वितीय श्रेणी के 21155 पद खाली हैं। पद भरने के लिए सरकार ने अप्रेल-मई में डीपीसी करने की मंशा जताई है।


Patrika

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