न्यायपालिका को संसद से पारित कानून की समीक्षा का अधिकार- बिरला

लोकसभा अध्यक्ष से पत्रिका की खास बातचीत

उदयपुर. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा है कि न्यायपालिका को संसद द्वारा पारित कानून की समीक्षा करने का अधिकार है। संविधान में जो अधिकार और व्यवस्था दी गई है, न्यायपालिका भी उन्हीं नियम-कानून के आधार पर समीक्षा कर सकती है।
उदयपुर सम्भाग के दौरे पर आए लोकसभा अध्यक्ष ने सलूम्बर में पत्रिका से खास बातचीत में कहा कि हमारे भारत में संविधान के बाहर न संसद, न न्यायपालिका काम कर सकती है। जिसको जितना अधिकार दिया है, जिसकी जितनी परिधि है, उसी में रहकर संवैधानिक कार्य किया जा सकता है।
देश में वर्तमान समय में सरकार की आलोचना और अभिव्यक्ति के अधिकार पर संकट सवाल पर बिरला ने कहा कि अभिव्यक्ति की आजादी सभी को है। यह संविधान प्रदत्त है। लेकिन, जब कानून बनता है, तो हर सदस्य अपनी बात कहता है। किसी को कोई रोक-टोक नहीं है। इसे न्यायपालिका भी नहीं रोक सकती है। आलोचनाएं और उसकी प्रतिक्रियाएं अलग-अलग परिप्रेक्ष्य में देखी जा सकती हैं।
– सफाई राज्य और आम जनता का भी विषय
बतौर सांसद कोटा में गंदगी हटाने के एक्शन प्लान के सवाल पर उन्होंने कहा कि पूरे भारत में सफाई होनी चाहिए। स्वच्छता अभियान सरकार की प्राथमिकता में है लेकिन, यह राज्य का भी विषय है और कोशिश रहनी चाहिए कि जनभावनाएं भी जुड़ें। इसे जनांदोलन बनाना चाहिए। लम्बित रेल परियोजनाओं को लेकर सांसदों द्वारा की गई मांगों पर उन्होंने इतना ही कहा कि मैं सदन में उनकी बात सुन सकता हूं, सरकार तक पहुंचाने की व्यवस्था दे सकता हूं।

Patrika

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