दूध का दूध, पानी का पानी करने की चुनौती

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सरकारी योजनाओं का अवैध ढंग से फायदा उठा रहे हैं हजारों परिवार, अब बीपीएल को गरीब नहीं, जरूरतमंद मानती है सरकार, देशभर में 2011 के बाद आर्थिक जनगणना

उदयपुर. पहले हर पांच साल में सर्वे के जरिये सरकार गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) जीवन जी रहे परिवारों को चिह्नित करती थी, लेकिन जिस तरह सरकारी योजनाओं का विस्तार हुआ है, उसी के मुताबिक अब गरीबों को जरूरतमंद मान लिया गया है। दस साल बाद दूसरी बार सर्वे के जरिये इन जरूरतमंदों की सूची तैयार की जा रही है। इस बार यह भी चुनौती है कि सरकारी योजनाओं का फायदा ले रहे हजारों-लाखों लोगों को बाहर का रास्ता दिखाया जाए।

पहली आर्थिक जनगणना 2011 में हुई थी। पहले केन्द्रीय और राज्य की बीपीएल सूची में बड़े पैमाने पर शामिल लोग सरकारी योजनाओं का अवैध ढंग से फायदा उठा रहे थे, जो बाद में आर्थिक जनगणना में भी नहीं छंटे। पिछली बार 17 करोड़ 97 लाख 87 हजार 454 परिवारों का आकलन सामाजिक, आर्थिक और जाति जनगणना, 2011 (एसइसीसी) के तहत हुआ था। उससे पहले ग्रामीण विकास विभाग देहाती इलाकों में गरीब परिवारों, जो विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों में संभावित लाभार्थी हो सकते हैं, उनकी पहचान के लिए बीपीएल जनगणना करवाता था। पहली बीपीएल जनगणना आठवीं पंचवर्षीय योजना के तहत वर्ष 1992 में हुई, 1997 में नौवीं पंचवर्षीय योजना में तथा वर्ष 2002 में दसवीं पंचवर्षीय योजना में बीपीएल जनगणना हुई थी।
– इन बिन्दुओं पर होगी गणना

हर परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति जैसे आवास, भूमि की जोत-भूमिहीनता, शैक्षणिक स्थिति, महिलाओं की स्थिति, दिव्यांगता, व्यवसाय, परिसंपत्तियों पर अधिकार, अनुसूचित जाति-अनुसूचित जनजाति परिवार की आय आदि विभिन्न पहलुओं पर आंकड़े जुटाए जाएंगे।
– यह है मकसद

एसइसीसी तीन मापदंडों पर आधारित श्रेणियों स्वत: बाहर छूट गए परिवार, स्वत: शामिल हो गए परिवार और वंचित परिवार के आधार पर ग्रामीण गरीब परिवारों की पहचान करता है। इन श्रेणियों में एकत्र आंकड़ों को आधार मानते हुए ‘स्वत: शामिल परिवारोंÓ और ‘वंचित परिवारोंÓ के लिए केन्द्र सरकार विभिन्न कल्याणकारी कार्यक्रमों के तहत लाभार्थियों का चयन करेगी।
– इस बार तीन करोड़ परिवार ज्यादा

केंद्र सरकार आर्थिक जनगणना के तहत इस बार 20 करोड़ घरों और प्रतिष्ठानों से सूचनाएं जुटाएंगी, जिसमें सामान्य सेवा केंद्रों (सीएससी) के माध्यम से करीब 15 लाख युवाओं (गणकों) को काम भी देगी। देशभर में 3 लाख सीएससी हैं। राजस्थान में कुल 1 करोड़, 02 लाख 23 हजार 073 में से पहली श्रेणी के 40,69,999 दूसरी श्रेणी के 72,091 और तीसरी श्रेणी के 5165212 परिवार थे, वहीं पूरे देश में 17 करोड़, 97 लाख 87 हजार 454 में से 70754003, 1595469 और 87303948 परिवार थे।

Patrika

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