दरें बढऩे के बाद भी घाटे की भरपाई नहीं कर पाएंगी बिजली कंपनियां

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प्रदेश में बढ़ रही बिजली दरों से जहां हर वर्ग प्रभावित है, वहीं बिजली कंपनियां घाटे की पूर्ति करने में जुटी है। पिछले माह बढ़ी दरों से प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक राजस्व मिलेगा, लेकिन बड़ी बात यह है कि इससे भी कंपनियों के वार्षिक घाटे की पूर्ति नहीं हो पाएगी…

उदयपुर। प्रदेश में बढ़ रही बिजली दरों से जहां हर वर्ग प्रभावित है, वहीं बिजली कंपनियां घाटे की पूर्ति करने में जुटी है। पिछले माह बढ़ी दरों से प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक राजस्व मिलेगा, लेकिन बड़ी बात यह है कि इससे भी कंपनियों के वार्षिक घाटे की पूर्ति नहीं हो पाएगी। कंपनियों का घाटा 7142 करोड़ है, जबकि बढ़ी हुई दरों से 5175 करोड़ राजस्व अधिक मिलेगा। लिहाजा इस साल बढ़ी दरों से भी घाटे की पूर्ति संभव नहीं है। कंपनियों को अब भी करीब दो हजार करोड़ रुपए का घाटा वहन करना पड़ेगा। इससे आशंका है कि बिजली की दरें आगामी समय में फिर बढ़ सकती है।

जयपुर, अजमेर एवं जोधपुर विद्युत वितरण निगमों ने वर्ष 2019-20 के लिए कुल 52640 करोड़ की वार्षिक राजस्व जरूरत और राज्य सरकार की ओर से मिले अनुदान के बाद कुल शुद्ध घाटा 7142 करोड़ रुपए प्रस्तावित किया है। इस घाटे को पूरा करने के लिए 5175 करोड़ की राजस्व वृद्धि का प्रस्ताव तैयार किया था, जिसके बूते बिजली दरों में इजाफा किया गया।

लोगों ने दिए थे सुझाव
बिजली कंपनियों की ओर से दरों में वृद्धि करने की याचिका नियामक आयोग में लगाए जाने के बाद विशेषज्ञों से सुझाव मांगे गए थे। इसमें जयपुर में 465, अजमेर में 469 और जोधपुर डिस्कॉम में 1451 लोगों ने टिप्पणियां की और सुझाव दिए। इसके बाद व्यक्तिगत सुनवाई भी की गई। प्रक्रिया 18 से 22 नवम्बर तक तीनों डिस्कॉम के लिए अलग-अलग की गई थी।

बिजली खरीद से वितरण तक
04 रु. प्रतियूनिट खरीद
1.5 रुपए अन्य खर्च
5.5 रुपए कुल लागत
7.5 रुपए यूनिट बिक्री
02 रुपए का मुनाफा संभव

डिस्कॉम की स्थिति
52640 करोड़ रु. वार्षिक जरूरत
7142 करोड़ रु. वार्षिक घाट
5175 करोड़ रु. जनता पर भार
10 हजार करोड़ रु. ब्याज देय
02 हजार करोड़ फिर भी घाटा

– बिजली कंपनियों पर बैंकों का कर्ज है। सालाना 10 हजार करोड़ रुपए ब्याज में देना पड़ता है। सरकार की ओर से किसानों को दी जाने वाली सब्सिडी समय पर कंपनियों को नहीं लौटाई जाती, जिससे कंपनियां घाटे में है। किसानों को सब्सिडी खाते में डाली जाए और खरीद-लागत कीमत बराबर हो तो किसी तरह का घाटा नहीं रहेगा। ऐसे में दरें कम की जा सकती है। इस संबंध में हमनें विनियामक आयोग में अपील की। किसानों को सब्सिडी खाते में देने की योजना में तेजी लाने की जरूरत है।
वाईके बोलिया, रिटायर्ड एसइ, एवीवीएनएल

Patrika

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