डिजिटल शिक्षा पर सुस्ती का वायरस!

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ऑनलाइन शिक्षा पर राज्य में इस साल 36.42 में से केवल सवा चार करोड़ खर्च, दो साल की अच्छी स्थिति के बाद पिछड़ रहा है राज्य

उदयपुर. स्कूल और कॉलेज शिक्षा में सूचना एवं तकनीकी (आइसीटी) पर खर्च के मामले में राजस्थान इस साल काफी पीछे रहा है। इस मद में तय किए 36.42 करोड़ के बजट के मुकाबले पिछले जनवरी, 2020 तक केवल 4.20 करोड़ रुपए ही इस पर खर्च हुए हैं, जबकि पूरा वित्तीय वर्ष लगभग पूरा हो चुका है।
पढ़ाई को अत्याधुनिक बनाने के लिए केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय कोशिशें तो खूब कर रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसे लेकर पैसा खर्च करने और विद्यार्थियों तक सुगम शिक्षा पहुंचाने को लेकर लापरवाही बरती जा रही है। पिछले तीन सालों का रिकॉर्ड देखें तो राज्य में 2017-18 में 42.41 के मुकाबले 86.53 और 2018-19 में 69.09 के मुकाबले 50.79 करोड़ रुपए आइटीसी पर खर्च किए गए, लेकिन इस साल लक्ष्य काफी दूर है। यही नहीं, दीक्षा प्लेटफॉर्म यानि डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर फॉर नॉलेज शेयरिंग के लिए भी राज्य को दिए एक करोड़ के बजट में से सिर्फ 11 हजार रुपए का खर्च अब तक हुआ है। समझा जा सकता है कि जिम्मेदार कितने सुस्त हैं।
डिजिटल एजुकेशन के लिए मंत्रालय ने कई तरह के मानक बना रखे हैं, जिनके आधार पर सामान्य व दिव्यांग विद्यार्थियों को दृश्य-श्रव्य माध्यम से न केवल ताजातरीन शैक्षिक नवाचार, जानकारियां, शिक्षण मुहैया कराने का मकसद है, बल्कि शिक्षकों को भी अपडेट रखा जाएगा और उन्हें ऑनलाइन एजुकेशन से जोड़ा जाएगा।
कई राज्य तो ऐसे हैं, जिन्होंने ऑनलाइन एजुकेशन को पूरी तरह किनारे कर रखा है। केन्द्र सरकार की ओर से जाहिर की गई अच्छा के मुकाबले एक धेला तक खर्च नहीं कर रहे हैं।

डिजिटल एजुकेशन के ये हैं सात पायदान
1. स्वयम् : इसके तहत हायर और स्कूली एजुकेशन में तमाम विषयों के तहत ऑनलाइन शिक्षा दी जाती है।
2. स्वयम् प्रभा : इसमें दोनों शिक्षा स्तरों के लिए 32 डीटीएच टीवी उच्च गुणवत्ता वाले शैक्षिक चैनल चलते हैं, जिससे जुड़े नि:शुल्क और ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर (एफओएसएसइइ) के उपयोग को बढ़ावा देना है।
3. अर्पित : हायर एजुकेशन में पढ़ा रहे शिक्षकों के लिए एक साल का ऑनलाइन रिफ्रेशर कोर्स है। इग्नू और एमिटी विवि की ओर से ग्रामीण इलाकों में ऑनलाइन डिग्री-डिप्लोमा भी करवाया जाएगा।
4. दीक्षा : शिक्षकों, छात्रों और अभिभावकों को निर्धारित स्कूल पाठ्यक्रम के अनुकूल प्रासंगिक शिक्षण सामग्री मुहैया कराई जाती है। टॉकिंग बुक्स फोर विजुअली इम्पेयर्ड लनर्स, वरिष्ठ माध्यमिक और माध्यमिक पाठ्यक्रम के लिए डेजी (डिजिटल एक्सेसिबल इनफार्मेशन सिस्टम) के तहत विकसित की हैं। यह श्रव्य माध्यम में उपलब्ध कराई जाती है, ताकि देखने में असमर्थ विद्यार्थी सुनकर पढ़ सकें।
5. मुक्त विद्या वाणी : वेब ऑडियो स्ट्रीमिंग-एनआइओएस ऑडियो स्टूडियो से हर दिन तीन घंटे लाइव व्यक्तिगत संपर्क कार्यक्रमों के जरिये अध्यापन कार्य कराया जाता है।
6. मुक्त शैक्षिक संसाधन (ओइआर) : राज्य स्तर के संस्थानों और संगठनों की साझेदारी में स्टैंडअलोन कार्यक्रमों सहित 10वीं व 12वीं के स्तरों पर व्यावसायिक कार्यक्रमों के लिए विशेष रूप से उपलब्ध हैं।
7. ई-पाठशाला : वेब पोर्टल के माध्यम से राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान संस्थान से शिक्षकों व स्कूल प्रमुखों के लिए मोबाइल ऐप विकसित किया है। 8 राज्यों के प्रमुखों व शिक्षकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है। 18 राज्यों में यह जारी है।

Patrika

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