टेढ़ी-मेढ़ी डगरिया पर बुझते चिराग, खून के छींटों को कम करना चुनौती

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टेढ़ी-मेढ़ी डगरिया पर बुझते चिराग, खून के छींटों को कम करना चुनौती

मोहम्मद इलियास/उदयपुर
प्रदेशभर में सडक़ दुर्घटनाओं को लेकर जहां सरकार व विभाग इनकी खामियों को ढूंढऩे में लगे हैं वहीं उदयपुर संभाग की घुमावदार सडक़ें सबसे बड़ी चुनौती है। ये सडक़ों पर आए दिन खून के छींटों से रंग कर किसी न किसी के घर का चिराग बुझाती है। इसके प्रमुख कारण घाट सेक्शन, घुमावदार सडक़ें व रोड इंजीनियरिंग में बड़ी खामी है। इस खामी के बावजूद यहां पर ओवरस्पीडिंग, ओवरलोडिंग, ओवरक्राउडिंग व नशे में वाहन चलाने वाले इतने हैं कि प्रतिवर्ष दुर्घटनाओं के साथ मौत का आंकड़ा बढ़ जाता है।
राजस्थान में वर्ष 2018 में 21743 दुर्घटनाओं में 10320 मौत हुुई तो वर्ष 2019 में यह बढकऱ 10563 हो गई। उदयपुर संभाग में अगर दुर्घटनाओं के आंकड़ों पर नजर डालें तो संभाग मेंं वर्ष 2019 में प्रतापगढ़ व राजसमंद में दुर्घटना के साथ ही मौत का ग्राफ बढ़ा है। इसके अलावा उदयपुर में 10, चित्तौडगढ़़ में 9, डूंगरपुर में 7, बंासवाड़ा में 8 फीसदी मौत के आंकड़ोंं में कमी दर्ज की गई लेकिन घायलों में हजारों की संख्या में कई अपंग हुए हैं।

दुर्घटनाओं के प्रमुख कारण
– राष्ट्रीय राजमार्गों राजमार्गों व हाइवे से जुडऩे वाली सम्पर्क सडक़ें
– उदयपुर संभाग टेढ़ी-मेढ़ी सडक़
– औद्योगिक क्षेत्र से ओवरलोडिंग
– गरीब व बाहरी क्षेत्र में मजदूरी के लिए जाने वाले आदिवासी
– सरकारी परिवहन साधनों को अधिक किराया, ओवरलोड जीप में सफर

ब्लैक स्पॉट में सुधार के नाम पर खानापूर्ति
सरकार ने सडक़ दुर्घटनाओं को कम करने के लिए पूरे राज्य में रोड ऑडिटर के रूप में इंजीनियर्स की नियुक्ति की, जिन्हें ब्लैक स्पॉट चिह्नित कर सुधार करवाने का काम करना था। इंजीनियर्स ने इस पर काम पूरा नहीं किया। रिपोर्ट के अनुसार संभाग में चिह्नित 130 ब्लैक स्पॉट्स में से अधिकतर पर सुधार नहीं हुआ। जहां काम हुआ, वहां खानापूर्ति या आसपास छोटा-मोटा सुधार किया, जबकि हर ब्लैक स्पॉट के आगे व पीछे दोनों ओर पांच-पांच मीटर सुधार कर उसकी विस्तृत रिपोर्ट बनानी थी।

इनका कहना है
उदयपुर संभाग में गत वर्ष की तुलना में 10 प्रतिशत कमी लाए है। इस वर्ष भी प्रयास करते हुए सडक़ सुरक्षा जागरूकता के साथ ही दुर्घटना वाले स्थानों पर चिहिृत कर विशेष काम करेंगे।
प्रकाश सिंह राठौड़, प्रादेशिक परिवहन अधिकारी–



Patrika

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