जिनेंद्र की आराधना से नष्ट होते कर्म मल

पद्मप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर पहाड़ा में आयोजन, सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरुआत

उदयपुर . पद्मप्रभु दिगम्बर जैन मन्दिर पहाड़ा में सोमवार से मुनि पूज्य सागर के सानिध्य में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामंडल विधान की शुरुआत हुई। आठ दिन तक भगवान की आराधना करेंगे। जिनेंद्र भगवान को 2065 अघ्र्य समर्पित करेंगे। दस बड़ी पूजा और एक बड़ी जयमाला के साथ विशेष आराधना होगी।

इस मौके पर मुनि पूज्य सागर ने कहा कि जिनेंद्र की आराधना करने से हमारे कर्म मल नष्ट जाते हैं। सभी को संकल्प करना है कि हम मन, वचन और काया से जिनेंद्र की आराधना करेंगे। शास्त्रों में कहा गया है कि जिनेंद्र देव की आराधना करने वाला तिर्यंच भी देव बन जाता है। नियम संकल्प करें कि संयम, त्याग के साथ रहकर जिनेन्द्र भगवान का पूजन करेंगे। पूर्व कर्मों का उदय है कि गुरु के सानिध्य में भगवान की आराधना करने का लाभ प्राप्त हुआ है। इस प्रकार की आराधना करते हुए जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाएं।
पहले कार्यक्रम की शुरुआत में पंचामृत अभिषेक किया गया, जिसमें शांतिधारा करने का लाभ प्रकाश अदवासिया, रमेश अदवासिया, दिनेश गुडलिया और रजत ने लिया। पुष्प वर्षा देवीलाल जैन ने की। स्वर्ण के पाश्र्वनाथ पर शांतिधारा धनराज सेठ ने किया। पहले दिन सौधर्म इन्द्र बनाने का लाभ प्रेम तितडिय़ा, यज्ञ नायक प्रकाश जैन को मिला।

मंडल पर पांच मंगल कलश स्थापना मधु मनोहर चित्तौड़ा, कमलेश चित्तौड़ा, सुरेन्द्र दलावत, प्रकाश अदवासिया, कांतिलाल कोठारी ने की। अखण्ड दीपक स्थापना सुरेन्द्र दलावत ने की। विधान में 2065 श्रीफल के साथ अघ्र्य चढ़ाए जाएंगे।





Patrika

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