जरूरी हुआ, तो बढऩे लगा जन्म-मृत्यु पंजीयन

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उदयपुर शहर में 40 से 80 प्रतिशत तक आया आंकड़ा

उदयपुर. पहले जन्म-मृत्यु प्रमाण-पत्र की उपयोगिता कम थी, तो लोग इन्हें बनवाने को लेकर लापरवाह होते थे, लेकिन आधार से लिंक होने और कई दस्तावेजों के साथ इसकी अनिवार्यता लागू होने के बाद पंजीयन के आंकड़े में उछाल आ गया है।
उदयपुर शहर में ही पिछले एक दशक में यह आंकड़ा 50 से लेकर 80 प्रतिशत से ज्यादा हो गया है। चूंकि अब घरेलू प्रसव जैसे हालात भी बदल चुके हैं और लोग संस्थागत प्रसव पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, ऐसे में वस्तुस्थिति भी सामने आने लगी है। खास पहलू यह है कि ये महत्वपूर्ण आंकड़े सरकार की योजनाओं और नीतियों को तय करने में भी काम आते हैं। इसलिए बढ़ते संस्थागत प्रसव और जन्म पंजीयन का सहारा नीति-निर्धारण में भी लिया जा रहा है।
– सरकार निशुल्क देती है प्रमाण-पत्र
बच्चे का जन्म अगर नगरी इलाकों में हुआ है तो नगर निकाय और ग्रामीण इलाकों में ग्राम पंचायतों में आवेदन करना होता है। सरकारी व निजी अस्पताल में हुए प्रसव के आधार पर पुष्टि के बाद निशुल्क प्रमाण-पत्र जारी होता है।
यहां काम आते हैं जन्म प्रमाण-पत्र
बर्थ सर्टिफिकेट बच्चे के जन्म के बाद आगे काफी काम आता है। इसका न होना कई बार कानूनी कार्यों में भी रोड़ा बन जाता है। सबसे पहले स्कूल में दाखिले के दौरान ही यह दस्तावेज मांगा जाता है। कॉलेज में प्रवेश, अपनी पहचान स्थापित व साबित करने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, बाल-विवाह सहित दुव्र्यवहार और शोषण के मामलों में कानूनी लड़ाई लडऩे, रोजगार के लिए आयु की सत्यता साबित करने, पासपोर्ट आवेदन, आप्रवासन जैसे ग्रीन कार्ड, विरासत और संपत्ति के दावों आदि के लिए यह काम आते है।
– देशभर में यह स्थिति
– राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-आर) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों के जन्म का पंजीयन वर्ष 2005-06 में 41.28 की तुलना में वर्ष 2015-16 में 79.78 हो गया। भारत में वर्ष 2017 के दौरान जन्म का पंजीकरण ८4.94 हुआ है। यूनिसेफ की वर्ष 2019 की रिपोर्ट के अनुसार इथोपिया में 34, नाइजीरिया, कांगो और पाकिस्तान में जन्म पंजीकरण का प्रतिशत 78, 96 और 48 है।
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जब से जन्म प्रमाण-पत्र को आधार से लिंक किया है, इसकी अनिवार्यता अधिकांश जगह बढ़ी है, तब से पंजीयन को लेकर जागरूकता आई है। सबसे अच्छी बात कि तय अवधि में आवेदन का कोई शुल्क नहीं लगता है।
नरेन्द्र श्रीमाली, स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम उदयपुर

Patrika

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