जब सभी खर्च यूनिट रेट में तो फिर फिक्स चार्ज क्यों?

रिटायर्ड इंजीनियरों का सवाल, विद्युत वितरण निगम के पास नहीं है जवाब, बढ़ी बिजली दरों के विरुद्ध रिव्यू अपील

उदयपुर . सरकारी विद्युत वितरण निगमों की ओर से बिजली दरों में की गई बढ़ोतरी को हाल ही में विद्युत विनियामक आयोग में स्वीकार तो कर लिया, लेकिन आंकड़ों के खेल में कई तरह के पेंच है, जो आमजन की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। आमजन की समझ से परे होने के कारण बड़ी दरों पर बात नहीं हो पाई, लेकिन रिटायर्ड इंजीनियरों ने जनहित में मुद्दा उठाते हुए विनियामक आयोग में रिव्यू अपील दायर की है। विशेषज्ञों का एक ही सवाल है कि जब बिजली आपूर्ति पर होने वाले सभी तरह के खर्च प्रति यूनिट की रेट में जोड़कर दरें बढ़ाई गई है तो फिर फिक्स चार्ज क्यों रखा गया है? इस पर विद्युत निगमों का जवाब देते नहीं बन रहा है।
राजस्थान विद्युत मण्डल रिटायर्ड अभियंता और अधिकारी जन कल्याण ट्रस्ट, समता पॉवर और रीको इंडस्ट्रियल एरिया वापी(दौसा) की ओर से हाल ही में बढ़ी बिजली दरों के विरुद्ध रिव्यू याचिका नियामक आयोग में दायर की गई है। बिजली बिलों में फिक्स चार्ज की गैर आवश्यकता पर भी नियामक आयोग चुप रहा और दरें बढ़ाने की स्वीकृति दी। इसको चुनौती देते हुए विद्युत वितरण की लाईनों का अनधिकृत उपयोग को भी नियामक आयोग की ओर से नजरअन्दाज करने का मुद्दा उठाया है। सार्वजनिक सुनवाई के समय भी यह मुद्दा उठाया गया था।
…तो नहीं बढ़ानी पड़ेगी दरें
रिटायर्ड इंजीनियर वाइके बोलिया ने बताया कि एक अनुमान के तौर पर अगर केबल ऑपरेटरों और संचार कम्पनियों की ओर से विद्युत लाइनों के उपयोग पर उनसे किराया वसूला जाए। ऐसे में सालाना दस हजार करोड़ की अतिरिक्त आय हो सकती है। विद्युत वितरण कम्पनियों ने इस प्रकार हो रही उनकी लाइनों के उपयोग को स्वीकारा था। नियामक आयोग ने उस समय भरोसा दिलाया था कि टैरिफ आदेश में इसका समुचित प्रावधान किया जाएगा, लेकिन नियामक आयोग ने आदेश में इसे नजरअन्दाज कर दिया। अगर नियामक आयोग इस विषय पर संज्ञान लेता तो विद्युत दरों में बढ़ोतरी की जरुरत नहीं पड़ती।
याचिका कानून सम्मत नहीं
बताया गया कि याचिका के अन्य पहलुओं में यह कानूनी मुद्दा भी उठाया गया है कि जब विद्युत वितरण कम्पनियों ने अपनी याचिकाएं नवम्बर-2018 में दाखिल कर दी थी, तब उन पर सुनवाई नहीं करके अगस्त-2019 में दुबार याचिकाएं दायर करवाना कानून सम्मत नहीं है। इस कारण नियामक आयोग का विद्युत दर बढ़ाने का आदेश गैर-कानूनी है।




Patrika

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