कोरोना का वायरस हवा में तीन घंटा, प्लास्टिक व स्टेनलेस स्टील पर तीन दिन रहता है: डॉ अक्षय

– चंद दिनों में फेंफड़े खराब करता है इसलिए सावचेत जरूरी – वल्र्ड हैल्थ ऑर्गेनाइजेशन के स्थानीय प्रभारी डॉ अक्षय से बातचीत

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. विश्व स्वास्थ्य संगठन के स्थानीय प्रभारी डॉ अक्षय का कहना है कि कोरोना का वायरस चंद दिनों में सर्दी, खांसी से शुरू होकर श्वास लेने में परेशानी पैदा करता है और बाद में निमोनिया के लक्षणों के साथ फेंफड़े खराब कर देता है। पत्रिका से विशेष बातचीत में बताया कि इस वायरस से खुद को बचाने के लिए सरकार की ओर से जो उपाय बताए गए हैं उन्हें तत्काल अमल में लाना चाहिए। उन्होंने बताया कि कोरोना का वायरस हवा में तीन घंटा और प्लास्टिक व स्टेनलेस स्टील पर तीन दिन तक बना रहता है, जहां से इसका संक्रमण संभव है।

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ये है विशेष बातें – हर होटल्स, मंदिर व मॉल्स को खास तौर पर उनकी रेलिंग व विभिन्न सतहों पर नियमित हाइपोक्लोराइड सोल्यूशन अनिवार्य रूप से इस्तेमाल करना ही चाहिए, क्योंकि कोरोना का वायरस हवा से ज्यादा सतह पर ठहरता है।

– 60 वर्ष से अधिक उम्र में खतरा:

कोरोना संक्रमित: 60 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों को ज्यादा खतरा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार …

उम्रवार – मृत्युदर

10 से19 वर्ष- 0.2 प्रतिशत

20 से 29 वर्ष-0.2 प्रतिशत

30 से 39 वर्ष- 0.2 प्रतिशत

40 से 49 वर्ष-0.4 प्रतिशत

50 से 59 वर्ष-1.3 प्रतिशत

60 से 69 वर्ष-3.6 प्रतिशत

70 से 79 वर्ष 8.0 प्रतिशत

80 से ऊपर- 14.8- 21.9 प्रतिशत

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बीमारियों पर ज्यादा घात, इसलिए संभलना जरूरी :

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार कोरोना का वायरस विभिन्न बीमारियों से ग्रस्त मरीजों पर ज्यादा घात कर रहा है। प्री-एक्साइटिंग कंडिशन–मृत्यु दर कन्फर्म केस- मृत्युदर ऑल केसेस

हृदय से जुड़ी बीमारियां-13.2-10.5 प्रतिशत

मधुमेह- 9.2 -7.3 प्रतिशत

क्रोनिक रेस्पिरेट्री -8.0 -6.3 प्रतिशत

हायपरटेंशन-8.4 -6.0 प्रति.

कैंसर-7.6 प्रतिशत-5.6 प्रतिशत

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ये भी खास जानकारी: – विश्व स्वास्थ्य संगठन केवल एक ही बात पर जोर दे रहा है कि इस वायरस का प्रसार जल्द से जल्द रोका जाए, लोग सतर्क रहेंगे तो ये वायरस फैलेगा नहीं।- एक संक्रमित व्यक्ति तीन से चार लोगों को संक्रमित कर सकता है। – संगठन ने उल्लेख किया है कि कोरोना वायरस के नियंत्रण के लिए जिस वैक्सिन पर काम चल रहा है, उसे पूरी तरह से तैयार करने में करीब तीन से छह माह तक लग सकते हैं।

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Patrika

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