कानून पढ़ाने वालों से ही मांगा हलफनामा, बीसीआई बोला ‘सच बताना’

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बीसीआई ने लॉ कॉलेजों पर कसा शिकंजा –

– बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने बांधे लॉ कॉलेजों के हाथ-पैर

भुवनेश पंड्या
उदयपुर. देश-प्रदेश में बेलगाम लॉ कॉलेजों पर शिकंजा कसने की नई तैयारी कर ली गई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने अब कानून पढ़ाने वालों से उनकी सच्चाई का हलफनामा मांग लिया है। इन कॉलेजों को अब ना सिर्फ नए नियमों की बेड़ी में बंधना होगा, बल्कि उन्हें हर बात सच बतानी होगी क्योंकि बीसीआई ने इन कॉलेजों से सारे सच की इबारत कानूनी कागज पर यानी स्टाम्प पेपर पर नोटेरी के साथ मांगी है।

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जो विश्वविद्यालय कानूनी शिक्षा प्रदान करते है, उन सभी के रजिस्ट्रार, सभी विश्वविद्यालयों, कानूनी शिक्षा प्रदान करने वाले कॉलेजों के डीन को बीसीआई ने पत्र जारी किया है कि नई मान्यता के अनुमोदन को नवीनीकृत करने के लिए नए कानून व नियम मानने होंगे।

– कोर संकाय, प्रत्येक पाठ्यक्रम को चलाने के लिए हर समय प्रत्येक विषय को पढ़ाने के लिए कॉलेज में पूर्णकालिक संकाय सदस्यों की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए, जो अनुमोदन के पहले वर्ष में छह से कम नहीं होगी, दूसरे वर्ष में आठ और तीसरे वर्ष के एकीकृत पाठ्यक्रम के मामले में दस इसमें विषयों में दी जाने वाली विषयों में पर्याप्त संकाय होने चाहिए।

– ऑनर्स प्रोग्राम के बिना केवल दो वर्गों के साथ तीन साल के बैचलर ऑफ लॉ डिग्री कोर्स के लिए पहले साल में 4 कोर फैकल्टी में से कम से कम दूसरे और छह में प्रिंसिपल के अलावा तीसरे वर्ष में होना चाहिए।

– विश्वविद्यालय के निरीक्षण के बाद पूर्णकालिक संकाय की कमी हो जाती है, नया जब तक संकाय की नई आवश्यक संख्या नहीं होती तब तक पाठ्यक्रमों में प्रवेश निलंबित किया जा सकता है।

– प्राचार्य सहित पूर्णकालिक संकाय सदस्य एक मास्टर डिग्री या निर्धारित नियमानुसार होंगे। यूजीसी या ऐसे अन्य मानक निकाय द्वारा। हालांकि नैदानिक कार्यक्रम पढ़ाने के लिए संकाय को सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों या बार से नियुक्त किया जा सकता है, जो दस वर्ष की न्यूनतम अवधि के लिए पेशेवर अनुभव वाला व्यक्ति हो। – प्रत्येक पाठ्यक्रम को चलाने के लिए प्रत्येक विषय को पढ़ाने के लिए कानूनी शिक्षा केंद्र में प्रत्येक पूर्णकालिक शिक्षक के लिए पर्याप्त संख्या में पूर्णकालिक संकाय सदस्य होने चाहिए।

– यूजीसी और बार काउंसिल ऑफ इंडिया के नियमों के तहत निर्धारित अलग प्राचार्य के रूप में कानून जो कानून के प्रोफेसर होने के लिए योग्य होना चाहिए।

– प्रधानाध्यापक को दिया जाने वाला वेतन अन्य लाभों के साथ समय.समय पर यूजीसी द्वारा अनुशंसित नियमानुसार होगा। कोर फ ुल टाइम फैकल्टी आमतौर पर सामान्य रूप से यूजीसी स्केल दिया जाता है।

– विधि छात्रों और शिक्षकों के लिए एक समान रूप से सुसज्जित लॉ लाइब्रेरी होनी चाहिए। बिना किसी लॉ सेंटर कोर्स को कानूनी शिक्षा प्रदान करने की उम्मीद नहीं हो सकती। इस पर हर वर्ष पांच लाख रुपए खर्च किया जाएगा, जिसे शुरू करने के लिए दस लाख रुपए का खर्च होना चाहिए।

– नियमानुसार सेमेस्टर प्रणाली लागू होगी।

– प्रत्येक छात्र को एक वर्ष में कम से कम तीन मूट कोर्ट करना चाहिए और उन्हें एलएलबी के अंतिम दो या तीन वर्षों के दौरान दो परीक्षणों में भाग लेने की आवश्यकता होगी।

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15 दिन का दिया था समय-उदयपुर कॉलेज ने भेजा जवाब बीसीआई ने जो-जो जानकारी एक पखवाड़े में मांगी थी, उसे उदयपुर लॉ कॉलेज से तैयार कर भेज दिया गया है, प्राचार्य प्रो आनन्द पालीवाल ने बताया कि जो नए नियमों के आधार पर जानकारी चाही गई है, उसे हमने उपलब्ध करवा दिया है।

Patrika

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