उदयपुर में भूकम्प के झटके, कोई नुकसान नहीं

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गुजरात के बनासकांठा में था केन्द्र, 3.5 से 4 की तीव्रता

उदयपुर. क्षेत्र में बुधवार रात 9.15 बजे कुछ सैकण्ड के लिए भूकम्प के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.5 से 4 तक मापी गई।
सीटीएइ, उदयपुर के पूर्व माइनिंग इंजीनियरिंग एवं जियोलॉजिस्ट डॉ. गोविन्द सिंह राव ने बताया कि भूकम्प का केन्द्र गुजरात के बनासकांठा में था। झटके उदयपुर में भी महसूस किए गए। अरावली पर्वत शृंखला के आसपास पांच सौ किलोमीटर की दूरी तक झटके लगे। अंतिम छोर पर भी 2 की तीव्रता के झठके महसूस किए गए। राव ने बताया कि कोई चिंताजनक बात नहीं है। कहीं कोई नुकसान की सूचना भी नहीं है। इस तरह के झटकों के आफ्टर शॉक की भी कोई सम्भावना नहीं है।

प्लेट्स के टकराने से आता है भूकंप
दरअसल, पूरी धरती 12 टैक्टोनिक प्लेटों पर स्थित है, जिसके नीचे तरल पदार्थ लावा के रूप में है। ये प्लेटें लावे पर तैर रही होती हैं। इनके टकराने से ही भूकंप आता है। यह धरती मुख्य तौर पर चार परतों से बनी हुई है, जिन्‍हें इनर कोर, आउटर कोर, मैन्‍टल और क्रस्ट कहा जाता है। क्रस्ट और ऊपरी मैन्टल को लिथोस्फेयर कहा जता है। ये 50 किलोमीटर की मोटी परतें होती हैं, जिन्हें टैक्‍टोनिक प्लेट्स कहा जाता है। ये टैक्‍टोनिक प्लेट्स अपनी जगह से हिलती रहती हैं, घूमती रहती हैं, खिसकती रहती हैं। ये प्‍लेट्स अमूमन हर साल करीब 4-5 मिमी तक अपने स्थान से खिसक जाती हैं। ये क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर, दोनों ही तरह से अपनी जगह से हिल सकती हैं। इस क्रम में कभी कोई प्लेट दूसरी प्लेट के निकट जाती है तो कोई दूर हो जाती है। इस दौरान कभी-कभी ये प्लेट्स एक-दूसरे से टकरा जाती हैं। ऐसे में ही भूकंप आता है और धरती हिल जाती है। ये प्लेटें सतह से करीब 30-50 किमी तक नीचे हैं।

Patrika

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