इस किताब में है देलवाड़ा ठिकाने के मूल संस्थापक से लेकर अंतिम राजराणा की बलिदानी गाथाओं का इतिहास

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देलवाड़ा ठिकाने का इतिहास पुस्तक की समीक्षा एवं विमोचन

उदयपुर. इतिहास एवं संस्कृति विभाग, माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय की ओर से डॉ. रेखा महात्मा लिखित ‘देलवाड़ा ठिकाने का इतिहासÓ पुस्तक समीक्षा-एवं विमोचन संगोष्ठी सोमानी सभागार में हुई।
मुख्य अतिथि विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि यह पुस्तक हमारे ज्ञानवद्र्धन के साथ ही उस क्षेत्र के विकास के लिए भी प्रेरणास्प्रद है। अध्यक्षता करते हुए जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विवि के कुलपति डॉ. एस. एस. सारंगदेवोत ने कहा कि डॉ. महात्मा ने पुस्तक में देलवाड़ा ठिकाने के इतिहास के सभी पहलुओं को सप्रमाण उजागर किया है। शोध निर्देशक डॉ. गिरीशनाथ माथुर ने देलवाड़ा ठिकाने के सामरिक, व्यापारिक एवं धार्मिक महत्व बताते हुए कहा कि पुस्तक से हमें ठिकाने के महाराणाओं, मुगलों एवं मराठों के साथ सम्बंधों की एवं यहां के जनजीवन की शोधपरक, प्रामाणिक देती है। समीक्षा करते हुए डॉ. राजेंद्रनाथ पुरोहित ने कहा कि पुस्तक में ठिकाने के मूल संस्थापक से लेकर देलवाड़ा के अंतिम राजराणा खुमाण सिंह एवं सरदारों द्वारा मेवाड़ की बलिदानी गाथाओं को रेखांकित किया है। इतिहासविद् प्रो. के. एस. गुप्ता, डॉ. रेखा महात्मा, डॉ. हेमेंद्र चौधरी, डॉ. रोशन महात्मा ने भी चर्चा की। संचालन डॉ. ममता पूर्बिया ने किया।

Patrika

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