आजीवन सदस्यता व टिकट शुल्क में वृद्धि का विरोध, वकील उतरे हड़़ताल पर

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– सरकार ने बार कौसिंल के प्रस्ताव से ज्यादा बढ़ाया शुल्क, आमजन पर पड़ेगा भार, अधिवक्ताओं को होगी आर्थिक हानि

उदयपुर. आजीवन सदस्यता शुल्क में बेतहाशा वृद्धि के विरोध में बार एसोसिएशन ने 2 दिन हड़ताल की घोषणा करते हुए गुरुवार को न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया गया। अधिवक्ताओं ने चेतावनी दी है कि राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम-1987 में संशोधन विधेयक 2020 में बार कौंसिल के प्रस्तावों के विपरीत किए गए संशोधनों को वापस नहीं लिया जाएगा तो आंदोलन किया जाएगा।

बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनीष शर्मा, महासचिव चक्रवतीसिंह राव, वरिष्ठ अधिवक्ता रमेश नंदवाना, शांतिलाल पामेचा नरपतसिंह के नेतृत्व में अधिवक्ता सुबह न्यायालय परिसर में एकत्रित हुए। यहां धरना प्रदर्शन के बाद सभी जुलूस के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे। जहां प्रदर्शन कर कलक्टर को ज्ञापन दिया। ज्ञापन में अधिवक्ताओं ने राजस्थान अधिवक्ता कल्याण निधि अधिनियम-1987 बार काउंसिल के प्रस्ताव के विपरीत किए गए संशोधनों को पारित करने से पूर्व पुन: विधानसभा में भेजकर इस पर पुनर्विचार करने की मांग की।

सरकार के निर्णय का विरोध

अधिवक्ताओं की सुबह बार एसोसिएशन कार्यालय में बैठक हुई। सभी ने अधिवक्ताओं के हितों पर किए जा रहे निर्णय पर आक्रोश जताते हुए कार्य बहिष्कार किया। वरिष्ठ अधिवक्ता शांतिलाल पामेचा की अध्यक्षता में बैठक हुई। अधिवक्ता गौतम लाल सिरोया, प्रफुल्ल करणपुरिया, सत्येंद्रपालसिंह छाबड़ा, राजेंद्रसिंह राठौड़, पूर्व अध्यक्ष प्रवीण खंडेलवाल, भरत वैष्णव, भरत जोशी, रामकृपा शर्मा सहित अन्य मौजूद थे। अधिवक्ताओं ने आजीवन सदस्यता शुल्क मेंं वृद्धि और एक्ट में विपरीत प्रावधानोंं को लागू करने पर आक्रोश जताया। निर्णय वापस लेने की मांग को लेकर दो दिवसीय हड़ताल करनेे का निर्णय लिया।

बार कौसिंल के प्रस्ताव और हुआ फेरबदल
किस्म — वर्तमान शुल्क — प्रस्ताव — बढ़ोतरी

आजीवन सदस्यता — 17500 — 30 हजार — एक लाख
वेलफेयर टिकट — 25 रु. — 50 रु. — 100-200 रुपए

(अधीनस्थ न्यायालय में 100 व हाइकोर्ट में 200 रुपए)

– प्रदेश में कुल अधिवक्ता- 90 हजार
– टिकट राशि वृद्धि से आदिवासी समुदाय पर अतिरिक्त भार

– सदस्यता शुल्क में वृद्धि से युवा वकीलों को आर्थिक परेशानी

Patrika

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