अपनों को खोया, अब सरकारी मेहरबानी का इंतज़ार

राज्यभर में 290 मृतक कर्मचारी के आश्रितों की अनुकंपा नियुक्ति अटकी, 110 प्रकरण तो डीइओ कार्यालय ने निदेशालय को ही नहीं भेजे

उदयपुर. उन्होंने सरकार में रहते हुए जनसेवा कर जान गंवा दी, अब उनके आश्रित पाई-पाई को मोहताज हो रहे हैं। परिवार का एक सदस्य सरकारी नौकरी पाने का हकदार है, लेकिन दस्तावेजी जांच और नियुक्ति प्रक्रिया में देरी उनके सब्र का इम्तिहान ले रही है। राज्यभर में जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही से अनुकम्पा नियुक्ति के 188 प्रकरण लम्बित पड़े हुए हैं। इसके अलावा 110 मामले जिला स्तर पर ही पेंडिंग हैं।
यह आंकड़ा तो केवल शिक्षा विभाग का है, अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाकी विभागों की स्थिति क्या होगी। प्रारम्भिक शिक्षा निदेशालय ने जिला शिक्षा अधिकारियों को एक चिट्ठी भेजकर अनुकम्पा नियुक्ति के इन सभी प्रकरणों में बकाया आपत्तियों की पूर्ति करने और मुख्यालय भिजवाने को कहा है। इन 180 प्रकरणों के अलावा 110 मामले ऐसे भी हैं, जिनकी फाइल एक बार भी निदेशालय भेजी ही नहीं गई हैं। दस्तावेज अभी तक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों की संस्थापन शाखाओं में ही धूल फांक रहे हैं। 32 बिन्दुओं पर हरेक प्रकरण की जांच करने के बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की अनुशंसा पर ही फाइल भिजवाई जानी है। किसी विशेष परिस्थिति में किसी प्रकरण में शिथिलता बरतने की जरूरत है, तो इसका भी उल्लेख अलग से करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही लापरवाही बरतने पर अनुशासनात्मक कार्यवाही की भी चेतावनी दी है।
– भटक रहे आश्रित
इधर, मृतक आश्रित बार-बार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालयों के चक्कर इस आस में लगा रहे हैं कि सरकारी नौकरी मिल जाए, तो वे घर चला सकें। इन मामलों में कर्मचारी ऑनड्यूटी मौत का शिकार हो गए। कोई चुनावी ड्यूटी पर आते वक्त रास्ते में सड़क हादसे में जान गंवा बैठा, तो किसी की कार्यालयी कामकाज के दौरान मौत हो गई।
– निदेशालय को प्राप्त इतने प्रकरण बाकी
जिला प्राप्त प्रकरण
झुंझुनूं 2
सीकर 5
बीकानेर 4
श्रीगंगानगर 18
हनुमानगढ़ 2
जोधपुर 3
बाड़मेर 7
जैसलमेर 3
पाली 9
सिरोही 6
जालोर 5
अजमेर 13
भीलवाड़ा 6
नागौर 2
टोंक 9
जयपुर 16
अलवर 15
दौसा 2
भरतपुर 4
स. माधोपुर 2
धौलपुर 2
करौली 2
कोटा 2
बारां 6
बूंदी 3
झालावाड़ 5
उदयपुर 7
चित्तौडग़ढ़ 4
डूंगरपुर 4
राजसमंद 2
बांसवाड़ा 9

Patrika

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