पूरा पढ़ें – विपक्ष लाख चाह ले मोदी पर ये आरोप नहीं लगा सकता

यूपी के लोगों से मुझे कुछ कहना है. दस का बल्ब भी खरीदते हैं तो दुकानदार से पूछते हैं कि दो तीन महीने चलने की गारंटी तो है ना? तो 5 साल के लिए जिसे विधायक चुनने वाले हैं, क्या उससे कभी पूछा है कि मेरे बेटे को रोजगार मिलेगा कि नहीं.?

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भारत की राजनीति चाहे आप उत्तर में देखें या दक्षिण में, पूरब में देखें या पश्चिम में हर जगह वंश वाद की जड़ पूरी तरह फैली हुई है।
ऐसे में प्रकाश नारायण सिंह (एबीपी न्यूज़)का ये लेख आपको सोचने पर मजबूर कर देगा कि क्या वंशवाद की राजनीति कभी देश का विकाश कर सकती है?

पढ़िए ये लेख और जानिये कि विपक्ष क्यों कभी भी मोदी पर हावी नहीं हो सकता।

‘समाजवादी पार्टी प्राइवेट लिमिटेड’ में पॉवर पॉलिटिक्स की पूरी फिल्मी कहानी आजकल सबका मनोरंजन कर रही है. सियासत का इतना घटिया रूप मैंने अपने छोटे से जीवन में कभी नहीं देखा था. हां.. छोटा ही सही लेकिन ऐसे फिल्मी प्रोमो हम दक्षिण में डीएमके और चंद्रबाबू नायडू के परिवार में भी देख चुके हैं. वंशवाद की अजगरी बेल ने पूरे लोकतंत्र को अपने जबड़े में जकड़ रखा है. मुझे यह कहने में अब थोड़ी भी हिचक नहीं है.

 

भारतीय लोकतंत्र में सड़ांध फैलाने वाले वंशवाद की एक झलक आपको दिखाता हूं. पूरब में पटनायक परिवार, पश्चिम में..ठाकरे परिवार, शरद पवार परिवार..उत्तर में..मुलायम परिवार, लालू परिवार…दक्षिण में करूणानिधि.. देश की सियासत में सबसे मजबूत गांधी परिवार. बताने के लिए तो लिस्ट बहुत बड़ी है. ये वैसे उदाहरण हैं जिनकी पार्टी ही परिवार है और परिवार ही पार्टी है.

 

जब देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने राजनीति में परिवारवाद की शुरूआत की थी और अपने जीवन काल में ही अपनी बेटी इंदिरा गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनवा दिया तब राम मनोहर लोहिया ने मर्माहत होकर कहा था कि देश की आजादी का मूख्य उद्देश्य अब शायद ही पूरा हो. अब कांग्रेस नेहरू परिवार की जागीर बन जाएगी. उनकी भविष्यवाणी सत्य हुई. आज कांग्रेस, नेहरू परिवार जो कि अब ‘गांधी परिवार’ के रूप में बदल गया है, उसकी जागीर बन कर रह गयी है. यही आलम आज दूसरी कई क्षेत्रीय पार्टियों का भी है. उत्तर प्रदेश में जो पारिवारिक लड़ाई पार्टी की लड़ाई बन कर चल रही है. वह अपवाद नहीं है. परिवार में विरासत की लड़ाई स्वभाविक है. दुखद यहां यह है कि कुछ ‘निरा मूर्ख’ इन दलों में सेक्यूलरिज्म और समाजवाद देखते हैं.

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